सुमेरपुर क्षेत्र के पचखुरा महान में खुदे तालाब को दिखाते बाबा कृष्णा नंद।
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भरुआसुमेरपुर। पचखुरा महान गांव में करीब 10 बीघे में फैले कलारनदाई तालाब को अकेले खोदने का सपना पाले वृद्ध बाबा कृष्णानंद ने सात वर्षों में चार हजार ट्राली मिट्टी खोद चुके हैं। अब तक तालाब में वर्ष भर पानी मौजूद रखने का इंतजाम कर दिया है। अब तालाब का पुराना स्वरूप लौटाने में जुटे बाबा का फावड़ा सुबह-शाम प्रतिदिन चटकता रहता है। इसके चलते अब उनकी पहचान बुंदेलखंड के मांझी के रूप में हो गई है।
पचखुरा महान में 200 वर्ष पुराना कलारनदाई नाम का ऐतिहासिक तालाब है। इसमें कई तरह के घाट है। कालांतर में सफाई न होने से यह पुराना स्वरूप खो बैठा था। एक दशक तक बारिश के बाद भी सूखा ही रहता था। वर्ष 2014 में अपनी जन्मभूमि लौटे सन्यासी बाबा कृष्णानंद उर्फ किशन पाल सिंह ने तालाब की दुर्दशा देखी तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। कभी तालाब में बचपन में नहाकर बड़े हुए कृष्णानंद महाराज ने इसे खोदने का संकल्प लिया और बगैर कुछ सोचे फावड़ा उठा जुट गए। शुरू में ग्रामीणों ने उन्हें सनकी करार दिया। लेकिन बाबा के समाज हित की भावना से तालाब का पुराना स्वरूप लौटने लगे। तो हर कोई सराहना करने लगा। बुंदेलखंड के इस मांझी ने चार हजार ट्राली मिट्टी खोदकर भीट (पार) में डाल चुके हैं।
बाबा के इस जज्बे को देख वर्ष 2016 में सपा सरकार में राज्य मंत्री ने गांव का दौरा कर बाबा को नगद धनराशि से पुरस्कृत किया था। तब तालाब का सरकारी धन से जीर्णोद्धार कराने आश्वासन दोबारा सरकार न आने पर संभव नहीं हो सका। इसके बाद बाबा कृष्णानंद को जल संरक्षण के कार्यों में जुड़ी कई संस्थाओं ने सम्मानित किया। बाबा ने कहा उनका संकल्प है कि वह एक क्रम से तालाब को पूरा अकेले दम खोदेंगे। बताया वह औसतन एक ट्रैक्टर की ट्राली भर मिट्टी प्रतिदिन खोद रहे हैं। बरसात छोड़ सात माह तालाब खोदने में तल्लीन रहते हैं। उनका सपना है कि वह 200 वर्ष पुराने स्वरूप को वापस लौटा कर अपना संकल्प पूरा करें। इसमें उन्हें किसी तरह की मदद की आस नहीं है।