राठ। पानी के लिए चारों ओर हाहाकार मचा है। 66 साल पुरानी जल संस्थान की पेयजल योजना से आपूर्ति होती है। जर्जर लाइन के कारण लीकेज की समस्या रहती है। मानक के अनुसार किसी भी पेयजल योजना की समयावधि 30 साल होती है।
नगर में वर्ष 1956 में पेयजल योजना बनी थी। तब दो ओवरहेड टैंक व 11 नलकूप 30 हजार की आबादी को पानी दे रहे थे। अब आबादी एक लाख पार कर गई है। 66 साल पुरानी योजना से काम चलाया जा रहा है। अंडर ग्राउंड पाइप लाइन गल चुकी हैं। कहीं न कहीं रिसाव व लीकेज होते रहते हैं। ओवर हेड टैंक जर्जर होने से हादसे की आशंका के कारण पूरे नहीं भरे जाते हैं। जल संस्थान के पास 14 नलकूप हैं। इनमें से आधे रिबोर की हालत में हैं। एसडीएम कोर्ट के पास लगा जल निगम का नलकूप डेढ़ साल से खराब है। मौजूदा में 12 से अधिक मोहल्लों में आपूर्ति बाधित रहती है। जल संस्थान के जेई बीपी सिंह ने कहा पाइप लाइन जर्जर हो चुकी है। सीमित संसाधनों से किसी तरह व्यवस्था हो रही है।
पठानपुरा में सीएचसी के पास एक पखवारे से नलों में पानी नहीं आया है। नगर पालिका के टैंकर कभी-कभार पहुंचते हैं। मोहल्ला वासियों ने विधायक मनीषा अनुरागी को ज्ञापन सौंपा है। मोहित यादव, दीपू यादव, बालकिशन, सेवाराम, प्रमोद कुमार, बाला श्रीवास, महेंद्र कुमार, रामनरेश श्रीवास्तव ने बताया कि जल निगम का नलकूप दो साल से बंद है। पाइप लाइनों में 15 दिन से पानी नहीं आया है।
जल संस्थान के पास टैंकर नहीं है। नगर पालिका के छह टैंकर 25 वार्डों को पानी पहुंचा रहे हैं। टैंकर देखते ही प्यासे परिवार टूट पड़ते हैं। धक्का-मुक्की के साथ मारपीट की नौबत आ जाती है। विवाद बढ़ने पर टैंकर चालक अपनी जान बचा मौके से भाग निकलते हैं।
1956 में 11 नलकूप लगाए गए। आज इनकी संख्या 15 है। इनमें एक डेढ़ साल से खराब है। नए नलकूपों के लिए कोई बजट नहीं है। नगर की आबादी बढ़ती जा रही है। बस्ती के अंदर पानी खारा होने से निजी हैंडपंप भी प्यास नहीं बुझा रहे हैं। समर्थ लोग आरओ का पानी खरीद कर पीते हैं। वहीं मध्यम वर्गीय परिवार मजबूरी में खारा व प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मौदहा बांध पेयजल योजना की घोषणा की थी। इसके तहत मौदहा बांध से पाइप लाइन के जरिए पेयजल आपूर्ति होनी है। 94 करोड़ 34 लाख की इस परियोजना को जून 2017 में वित्तीय मंजूरी मिली थी। 2018 व पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 20 करोड़ दो किस्तों में मिले हैं। इससे बमुश्किल 20 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हो सका है। जून 2020 में परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य था। कार्यदाई संस्था के अवर अभियंता संजीव कुमार ने कहा कि बजट के अभाव में काम रुका है।