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मवेशियों के लिए खरीदा गया भूसा बारिश में सड़ रहा

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पत्योरा (हमीरपुर)। गांव की सरकार बदलते ही अनियमितताओं की पोल खुलने लगी है। पशु आश्रय स्थलों में गड़बड़ियों की पोल नई पारी शुरू करने वाले प्रधान ही खोलने लगे हैं। ऐसा ही मामला पत्योरा गांव का सामने आया है। जहां बने अस्थायी पशु आश्रय स्थल में पूर्व प्रधान व सचिव की साठगांठ से जमकर धांधली का आरोप प्रधान ने लगाया है। प्रधान ने गोशाला में अन्ना मवेशियों को संरक्षित कराने में हाथ खड़े कर दिए हैं। मवेशियों के लिए खरीदा गया भूसा खुले में पड़ा होने से बारिश में सड़ रहा है। वहीं 300 से अधिक मवेशी गलियों में भूखे भटक रहे हैं। वहीं गोवंश संरक्षित न होने से किसान फसलें बोने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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गांव निवासी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया गोआश्रय स्थल पर मवेशियों को संरक्षित करने की सही व्यवस्था नहीं है। ऐसे में करीब 300 मवेशी अन्ना घूम रहे हैं। जिससे फसल बोने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। भरण पोषण के लिए खरीदा गया भूसा खुले आसमान के नीचे पड़ा है। धांधली के चलते निवर्तमान प्रधान गोवंश संरक्षित करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरविंद निषाद ने कहा अस्थायी पशु आश्रय स्थल में मानक अनुरूप निर्माण कार्य न होने से मवेशी अभी तक संरक्षित नहीं किए गए हैं।
कहा आश्रय स्थल के नाम पर मनरेगा व 14वें वित्त से लाखों रुपये का बंदरबांट किया गया। हालात ये हैं कि मवेशियों के भरण पोषण के लिए भूसा आदि रखने के लिए गोदाम नहीं है। आश्रय स्थल में लगा टिनशेड कबाड़ से खरीद कर लगा दिया गया है। छाया की ठीक से व्यवस्था नहीं है। गेट टूटा होने से मवेशी गोशाला से निकल जाते हैं। कहा इसके लिए दूसरी जगह नवीन परती जमीन चयनित की है, लेकिन प्रशासनिक सहयोग न मिलने से मवेशियों को संरक्षित नहीं कर पा रहे हैं। इस मामले में सचिव रामसेवक ने कहा आश्रय स्थल के लिए दूसरी जगह चयनित की गई है। जो एक पखवाड़े के अंदर तैयार कर ली जाएगी। जल्द ही सभी अन्ना मवेशियों को संरक्षित किया जाएगा।
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