हमीरपुर। सफेद चांदी के नाम से जानी जाने वाली लहसुन की खेती जिले के किसानों को खूब भा रही है। यही कारण है कि रबी अभियान में लहसुन व प्याज का उत्पादन कर किसान अपनी आमदनी दोगुनी करने में सफल रहे हैं। इसी के चलते समूचे बुंदेलखंड में जिला लहसुन व प्याज उत्पादन में अव्वल है।
जिले में करीब 300 किसानों ने 160 हेक्टेयर में लहसुन की खेती की है। जिसमें करीब 15 हजार क्विंटल लहसुन का उत्पादन किया है। कृषि विश्व विद्यालय बांदा व कृषि विज्ञान केंद्र रबी अभियान में एकीकृत बागवानी विकास मिशन परियोजना के जरिए लहसुन उत्पादन में लगे किसानों को निशुल्क बीज उपलब्ध कराया है। समय-समय पर कृषि तकनीक से फसल उत्पादन के गुर सिखाए। बुंदेलखंड में अन्ना मवेशियों से परेशान किसानों का लहसुन, प्याज की खेती की ओर रुझान बढ़ा है। इसे अन्ना मवेशी व जंगली सूअर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
साथ ही दैवीय आपदाओं से फसल पूर्णतया सुरक्षित है। कृषि विश्वविद्यालय के प्रोजेक्ट इंचार्ज डा. भानु प्रसाद मिश्रा व विज्ञान केंद्र कुरारा के वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने किसानों को इसकी खेती करने के प्रति विश्वास जगाया है। वैज्ञानिकों ने कहा लहसुन व प्याज उत्पादन में जनपद बुंदेलखंड में नंबर एक पर पहुंच गया है। परियोजना के तहत 170 किलो निशुल्क बीज वितरित किया है। वहीं उद्यान विभाग के जरिए 13 क्विंटल बीज वितरित कराया गया है। जिले में करीब 160 हेक्टेयर में लहसुन की खेती किसानों ने की है। जिसमें करीब 15 हजार क्विंटल लहसुन का उत्पादन किसानों ने किया है। कहा प्रति हेक्टेयर 150-160 क्विंटल लहसुन का उत्पादन होता है। लहसुन की मुख्य प्रजातियों में यमुना सफेद, जी-5, जी-11 आदि हैं।
एक बीघे में 21 क्विंटल पैदा किया लहसुन
विकासखंड सुमेरपुर के पत्योरा गांव निवासी किसान बृजराज सिंह ने बताया अभी तक वह पारंपरिक खेती करते रहे हैं। जिसमें साल भर के खाने के अलावा कुछ भी नहीं बचता था। रबी अभियान में केवीके वैज्ञानिक डा. चंचल ने लहसुन व प्याज की खेती करने की सलाह दी। उन्हीं की प्रेरणा से एक बीघा में एक क्विंटल बीज जी-11 प्रजाति का लाकर लगाया। जिसमें करीब 25 हजार रुपये की लागत आई। इसमें 21 क्विंटल लहसुन का उत्पादन हुआ है। जो इस समय 70 से 80 रुपये किलो के भाव में बिक रहा है। किसानों के लिए यह फसल बिल्कुल सुरक्षित है। इस बार दो बीघे में लहसुन की खेती करेंगे।
रबी सीजन में पैदा की 400 क्विंटल प्याज
कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने बताया किसानों ने खरीफ अभियान में भी प्याज की नर्सरी लगानी शुरू कर दी है। बताया रबी सीजन में मिश्रीपुर गांव के अर्जुन सिंह ने दो हेक्टेयर में 400 क्विंटल प्याज पैदा की है। इस बार वह खरीफ सीजन में तीन हेक्टेयर में प्याज लगाने के लिए नर्सरी तैयार कर चुके हैं।
पत्योरा गांव में लहसुन की फसल दिखाते किसान ब्रजराज सिंह।- फोटो : HAMIRPUR