हमीरपुर जिले में खरीफ सीजन में लक्ष्य के सापेक्ष साढ़े चार हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें नहीं बोई जा सकी हैं। जहां सबसे अधिक तिल की फसल बोई जाती है। इस वर्ष बारिश अच्छी होने से तिल की फसल में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
करीब 10 वर्ष बाद हुई मूसलाधार बारिश में तिल की फसलें खराब हुई हैं। ऐसे हालात में फसल बीमा करा चुके 400 किसानों ने नुकसान पर दावा किया है। खरीफ सीजन में मुख्य रुप से धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, अरहर, तिल, मूंगफली व सोयाबीन की फसलें बोई जाती हैं।
जिसमें इस वर्ष 43 हजार 168 हेक्टेयर तिल की फसल का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। किसानों ने 38 हजार 971 हेक्टेयर में तिल बोया। अरहर में 18929 के सापेक्ष 17902, उड़द में 21470 के सापेक्ष 18922, ज्वार में 20221 के सापेक्ष 17520, सोयाबीन 208 के सापेक्ष 198 हेक्टेयर में फसलें बोई गईं।
इस वर्ष धान का 46 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला, लेकिन किसानों ने 3250 हेक्टेयर में धान की रोपाई की है। कुल एक लाख 8 हजार 925 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 4960 हेक्टेयर में किसानों ने खरीफ फसलें बोई हैं। राजस्व विभाग ने बोई गईं फसलों के नष्ट होने की सूचना शासन स्तर पर भेजी है।
पत्योरा निवासी किसान अनंता सिंह ने बताया करीब तीन हेक्टेयर में तिल की फसल बोई थी। जो बारिश में सड़ गईं। करीब 50 हजार का नुकसान हुआ है। इलाहाबाद बैंक सुमेरपुर से केसीसी बनवाया था। जिसका क्लेम किया है।
जल्ला निवासी कमल सिंह ने कहा 24 घंटे बारिश होने से खेत तालाब बन चुके हैं।
तिल की 12 बीघे की फसल पूरी तरह पानी में डूबी है। परिवार के भरण पोषण की चिंता सता रही है। पानी भरे रहने से नुकसान होना तय है।जल्ला निवासी भोला प्रसाद द्विवेदी ने कहा आषाढ़ माह में बारिश होने पर तिल की फसल बोई थी। 24 बीघे में फसल लहलहा रही थी। पानी के निकासी का जुगाड़ नहीं है। फसल जलमग्न होने से नुकसान होने का अंदेशा है।
खरीफ में तिल की फसल नष्ट हुई है। फसल बीमा करा चुके किसानों में अभी तक 400 ने प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम का दावा किया है। 4960 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी फसलों का नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है। वह बिना देरी किए दावा कर सकते हैं।
-सरस कुमार तिवारी, जिला कृषि उप निदेशक