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Hamirpur News: सभी 13 पिलरों का लोड टेस्ट होने के बाद शुरू होगा पुल का काम

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कुरारा। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के बाद अब निर्माण गुणवत्ता और मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग लापरवाही के साथ-साथ भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। मृतकों के परिजनों से लेकर साइट पर काम करने वाले कर्मचारियों तक ने दावा किया है कि यदि निर्माण कार्य मानक के अनुरूप हुआ होता तो पिलर इस तरह टूटकर नहीं गिरता। इन आरोपों को प्रशासन और विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। जांच में जुटी विशेषज्ञों की टीम ने स्पष्ट किया है कि पुल के सभी 13 पिलरों की लोड टेस्टिंग कराई जाएगी।
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सामान्य तौर पर यह परीक्षण पुल का निर्माण पूरा होने के बाद किया जाता है, लेकिन हादसे के बाद अब दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ही प्रत्येक पिलर की क्षमता जांची जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार लोड टेस्ट के जरिये यह परखा जाएगा कि पिलर निर्धारित भार सहन करने की स्थिति में हैं या नहीं। जांच में यदि कोई पिलर कमजोर या मानक के विपरीत पाया गया तो उसे गिराकर दोबारा निर्माण कराया जाएगा।

उधर पुल हादसे में छह परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं। सोमवार को मौके पर पहुंची सेतु निगम की विशेषज्ञ जांच टीम ने भी माना कि मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखना बड़ी चूक रही। जांच के लिए पहुंचे सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने कहा कि हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मृतकों के परिजनों के प्रति विभाग की गहरी संवेदनाएं हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि आंधी-तूफान को लेकर पहले से मौसम विभाग का अलर्ट जारी था। ऐसे हालात में निर्माण कार्य बंद करा देना चाहिए था।
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उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन किसी भी प्रोजेक्ट में सर्वोच्च प्राथमिकता होता है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खराब मौसम के बीच भी पुल पर काम जारी रहा। इसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। इस पर क्या कार्रवाई होगी इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा। ग्रामीणों और श्रमिकों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लिया जाता तो छह लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

हादसे के बाद से निर्माण एजेंसी, सेतु निगम और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट अब यह तय करेगी कि हादसा सिर्फ तेज आंधी-तूफान का नतीजा था या फिर निर्माण में तकनीकी खामियां और गुणवत्ता में कमी भी इसकी बड़ी वजह रहीं।



पुल का निर्माण पूरा होने के बाद होने वाली पिलरों की लोड टेस्टिंग इस बार पहले कराई जाएगी। दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी 13 पिलर की क्षमता जांची जाएगी। मानक के विपरीत होने पर दोबारा निर्माण कराया जाएगा। - मिथलेश कुमार, संयुक्त प्रबंध निदेशक, सेतु निगम
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