हमीरपुर। सोमवार सुबह से बिगड़े मौसम से किसान कराह उठा। एक लाख हेक्टेयर में बोई रबी फसलें तबाह हो गई हैं। बारिश से खरीफ में बोई गई कटी एवं खड़ी फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। वहीं, बुआई लगातार पिछड़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों के मुताबिक 50 वर्ष बाद ऐसे हालात नजर आए हैं। अचानक लौटे बेमौसम मानसून ने किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। सदर तहसील में छह मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। अधिकतम पारा 25.2 व न्यूनतम 22.2 डिग्री सेल्सियस रहा है।
जिले में रबी सीजन में कुल 2,96,108 हेक्टेयर में गेहूं, चना, मटर, मसूर, राई, सरसों आदि फसलों का लक्ष्य निर्धारित है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अब तक रबी सीजन में किसानों ने 1,10,121 हेक्टेयर में फसलों की बुआई कर दी है। लक्ष्य का 37.19 फीसदी फसलें बोई जा चुकी हैं। इनमें धान्य फसलों का लक्ष्य 1,39,695 हेक्टेयर के सापेक्ष 6,160 हेक्टेयर में किसानों ने गेहूं, जौ व मक्का की फसलें बाेई हैं। वहीं, दलहनी फसलों का लक्ष्य 1,17,337 हेक्टेयर के सापेक्ष 71,623 हेक्टेयर में फसलें बोई गई हैं। इनके अलावा तिलहनी 39,076 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 32,338 हेक्टेयर में राई, सरसों की फसलें किसानों ने बो रखी हैं। वहीं, एक लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में खरीफ फसलें किसानों ने बोई थीं। मौजूद में यह फसलें खेतों में कटी पड़ी हैं। इनके खराब होने की अधिक संभावना है।
सोमवार को अचानक मौसम ने एक बार फिर पलटी मारी और सुबह पांच बजे से रिमझिम बरसात शुरू हो गई। यह सिलसिला सारा दिन जारी रहा। इससे कृषि कार्य पूर्णरूप से ठप हो गए। बारिश से खरीफ में बोई गईं धान, तिल, उड़द, मूंगफली, मूंग, ज्वार, बाजरा आदि की कटी एवं खड़ी फसलों में विपरीत असर पड़ा है। साथ ही रबी फसलों की बुआई लगातार पिछड़ने से किसान परेशान हो उठा है। सरीला क्षेत्र में बीती रात से बरसात हो रही है। इसके चलते किसानों द्वारा हाल ही में बोया गया हरा एवं अन्य किस्मों का मटर, लाही आदि का बीज अंकुरित होने से पहले ही खेतों में दफन हो गया है।
किसान महिपाल का कहना है कि किसानों ने 12 हजार रुपया प्रति क्विंटल की दर से हरा मटर खरीद कर बोया है। बारिश से इसकी बिजगुड़ी हो गई है और किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। किसान रामगोपाल, मदन कुमार आदि का कहना है कि रबी में लाही, मटर, चना आदि बीजों का नुकसान हुआ है। शासन प्रशासन को नुकसान का आंकलन कराकर किसानों को आर्थिक मदद देनी चाहिए।
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80 हेक्टेयर में बोया धान, तीन हेक्टेयर की हुई कटाई
मुस्करा क्षेत्र के उमरी गांव में लगभग 60 फीसदी किसान धान की खेती करते हैं। किसान अनिल पालीवाल ने बताया कि उन्होंने बलकट और बटाई लेकर करीब 80 हेक्टेयर में धान की खेती की थी। अभी तक सिर्फ तीन हेक्टेयर की कटाई हो पाई है। अगर धूप नहीं निकली तो वह भी काला पड़ जाएगा। शेष फसल भगवान भरोसे ही खड़ी है। काफी फसल गिर गई है।
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13 हेक्टेयर में बोई खरीफ फसल चौपट
बांधुर खुर्द निवासी किसान व पूर्व प्रधान सुमित पालीवाल ने बताया कि लगभग 13 हेक्टेयर में तिल, अरहर और उड़द की फसल बोई थी, लेकिन लगातार बारिश होने से फसलों की कटाई तक नहीं कर पाए हैं। सब फसलें बर्बादी की कगार पर हैं। इधर 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से हरे मटर का 22 क्विंटल बीज खरीदा था। इसे बोने का मौका ही नहीं मिला है। इसमें भी घुन लग गया है, पता नहीं कब गेहूं बोया जाएगा।
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बारिश से धान की फसल को झटका
सुमेरपुर क्षेत्र के टेढ़ा गांव के किसान गोपीश्याम द्विवेदी ने बताया कि बारिश होने से धान की फसल को झटका लगा है। पककर कटने को तैयार खड़ी फसल बारिश के कारण खेतों में गिर रही है। साथ ही कटा हुआ धान बारिश से भींगकर खराब हो रहा है।
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पांच दशक बाद बने ऐसे हालात
पचखुरा के किसान अमर सिंह कहते हैं कि ऐसे हालात पांच दशक बाद देखने को मिले हैं। 50 वर्ष पूर्व देवउत्थान एकादशी तक बारिश हुई थी और हजारों बीघे जमीन में बोई गई रबी फसलें खेतों में पानी भरने से खराब हो गई थीं। उन्हें कार्तिक पूर्णिमा के बाद दोबारा बोया गया था।
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50 बीघे में कटी व 50 बीघे खड़ी धान की फसल
कुरारा क्षेत्र जखेला गांव के किसान जीतेंद्र सिंह ने बताया कि सोमवार सुबह से ही लगातार बारिश हो रही है। 50 बीघा में धान की फसल कटी पड़ी है। वहीं, 50 बीघा काटने को खड़ी है। अधिक बारिश होने से फसल सड़ने की संभावना है।
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फसल का दाना काला पड़ने की संभावना
टोडरपुर गांव के किसान कृष्ण कुमार कुशवाहा ने बताया कि 20 बीघे में धान की फसल कटी पड़ी है। बारिश से फसल का दाना काला पड़ने की संभावना है। इससे खेत में लगी लागत तक निकालना मुश्किल हो जाएगा।
दो दिन और बारिश की संभावना
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि अगले दो से तीन मौसम खराब रहने की संभावना है। अधिक बारिश होती है तो रबी सीजन में बोई गईं चना, मटर, मसूर व राई आदि फसलों का जमाव नहीं हो सकेगा। साथ ही खरीफ फसलों में सबसे ज्यादा धान, तिल, मूंगफली व बाजरा फसलों का नुकसान होने का अंदेशा है। इस बारिश से केवल गेहूं की फसल को ही फायदा है।
जिले भर में अब तक 37 फीसदी से अधिक रकबे में किसानों ने रबी फसलों की बुआई कर दी है। अधिक बारिश होने से इन फसलों के अंकुरण में समस्या होगी। साथ ही खरीफ फसलों का भी नुकसान है। - डॉ. हरिशंकर, जिला कृषि अधिकारी।