मौदहा। कोतवाली क्षेत्र के करहिया गांव में रंजिश में चचेरे भतीजे ने बृहस्पतिवार को दिनदहाड़े कुल्हाड़ी से हमलाकर चाची की हत्या कर दी। हत्यारोपी का आक्रोश देख मौजूद लोगों ने वृद्धा को बचाने की कोशिश नहीं की। आरोपी सभी के सामने खून से सनी कुल्हाड़ी लहराता हुआ गांव से भाग गया। सूचना पर पहुंचे पुलिस के आलाधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। देर शाम तक किसी ने तहरीर नहीं दी।
गांव निवासी मेड़ेलाल ने बताया कि पत्नी कल्ली (62) बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे जब अपनी पारिवारिक नातिन को अस्पताल से दवा दिलाकर घर आ रहीं थीं। तभी उसके पारिवारिक भतीजा धर्मेंद्र ने रास्ते में कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। घायल कल्ली वहां मौजूद लोगों से अपनी जान बचाने की गुहार लगाते हुए अपने घर की ओर भागी, हत्यारोपी उसके पीछे भागा, इस दौरान वह अपने घर के दरवाजे के पास नाली के कीचड़ में फिसलकर गिर पड़ी, तभी धर्मेंद्र ने उसके ऊपर कुल्हाडी से कई वार किए। एक-दो वार तो उन्होंने बचाया, लेकिन जब हाथ घायल हो गए तो हत्यारोपी ने उनके गर्दन व सिर पर कई वार किए। इससे उसकी गर्दन लगभग अलग हो गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना से गांव में दहशत का माहौल है। घटना की सूचना मिलने पर अपर एसपी मनोज कुमार गुप्ता, सीओ राजकुमार पांडे व कोतवाल उमेश कुमार सिंह दलबल के साथ मौके पर आए और मृतका के शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी।
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कानपुर में मजदूरी करते है पति व बेटे
पति मेड़ेलाल ने बताया कि वह अपने बेटों ज्ञान सिंह व मानसिंह के साथ कानपुर में रहकर मेहनत मजदूरी करते हैं। पत्नी का भी कानपुर आना-जाना बना रहता था। हाल में कुछ दिन पूर्व वह गांव आई थी।
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ये था विवाद
मेड़ेलाल ने बताया कि नवरात्र में परिवार सहित गांव के मंदिर में हवन पूजन किया था। तभी यज्ञ वेदी में लगी ईंटें हत्यारोपी धर्मेंद्र निकालने लगा था। पत्नी कल्ली ने भतीजे धर्मेंद्र को यज्ञ वेदी से ईंटें हटाने के लिए मना किया तो वह गाली-गलौज करने लगा। जिसपर उसने गुस्से में आकर उसे दो-तीन डंडे मार दिए थे। तभी से वह गांव में कहता घूम रहा था कि जिस दिन कल्ली (चाची) मिल जाएगी तो जान से मार देगा। तभी से वह बाहर काम करने भी नहीं गया और गांव में रुककर उसका इंतजार कर रहा था। दीपावली के बाद कानपुर से गांव आई थी। मौका मिलते ही उसने हत्या कर दी।
सुबह चार बजे तालाब में नहाकर देवी मंदिर में करता पूजा
हत्यारोपी धमेंद्र ने एक वर्ष पूर्व बांदा में किराये का ई-रिक्शा चलाता था। इसके बाद गांव आ गया और मेहनत-मजदूरी करके अपना भरण पोषण करता था। ग्रामीणों के अनुसार, वह अपने पिता का अकेला था। इसके बड़े भाई की तीन वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। जब से बांदा से आया तब से वह पिता से अलग रहता था और रोज सुबह चार बजे उठकर तालाब में नहाता और देवी मंदिर में पूजा करता था।
तहरीर अभी नहीं मिली है। परिजनों ने नवरात्र के समय पूजन पाठ करते समय कुछ विवाद होने की बात बताई है। उसी खुन्नस में आकर घटना को अंजाम दिया है। हत्यारोपी की तलाश के लिए टीमें लगा दी गई हैं। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
राजकुमार पांडे, सीओ मौदहा