हमीरपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शासन ने शहरों और गांवों में अमृत उद्यान स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। जिले की 330 ग्राम पंचायतों और सातों नगर निकायों में अमृत उद्यान बनाए जाएंगे। इन उद्यानों की पांच साल तक देखरेख एवं प्रबंधन की भी जिम्मेदारी होगी। उद्यानों की पौध बढ़ने के बाद लोगों को प्राणवायु मिलने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी होगा।
जिले की सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक अमृत उद्यान बनाया जाएगा। इसमें छायादार और फलदार पौधे रोपे जाएंगे। ज्यादातर पौधे स्थानीय प्रजाति के होंगे, जिनका औषधीय महत्व होने के साथ ऑक्सीजन देने में खासा योगदान रहता है। जिले की 330 ग्राम पंचायतों में एक-एक उद्यान स्थापित होगा। इसके साथ ही जिले की तीनों नगर पालिकाओं व चारों नगर पंचायतों में भी ग्राम पंचायतों की तरह एक-एक अमृत उद्यान बनाया जाएगा। इन उद्यानों में कम से कम 750 पौधे रोपित किए जाएंगे। अमृत उद्यानों की देखरेख एवं प्रबंधन का जिम्मा संबंधित ग्राम पंचायतों एवं नगर पालिका तथा नगर पंचायतों का होगा। पांच वर्ष तक समुचित देखभाल के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम भी किए जाएंगे। उद्यानों को बनाने लिए संबंधित विभाग स्थलों के चयन आदि से लेकर पौध रोपने की तैयारियां कर रहे हैं।
शासन के निर्देेश पर अमृत उद्यानों के लिए कार्ययोजना बन चुकी है। इन उद्यानों को बनाने का कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों और नगर निकायों को करना है। वन विभाग की ओर से नियमानुसार पौध उपलब्ध कराई जाएगी।
उमेशचंद्र राय, डीएफओ।
इन प्रजातियों के लगेंगे पौधे
बरगद, पीपल, पाकड़, गूलर, अशोक, नीम, आम, बेल, महुआ, सहजन, आंवला, जामुन, शीशम, इमली, अर्जुन आदि प्रजाति के पौधे स्थानीय कृषि जलवायु के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में रोपित किए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय कृषि जलवायु के अनुरूप कृषि वैज्ञानिकों एवं उद्यान विभाग के परामर्श अनुसार संबंधित क्षेत्रों में पौधों का चयन किया जा सकेगा। इन पौधों में कई का औषधीय महत्व भी है। ऐसे में अमृत उद्यान में लगने वाले पौधे पेड़ बनने के बाद ऑक्सीजन बढ़ाने के साथ ही औषधीय रूप में भी उपयोगी साबित होंगे।