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किसानों को भा रही खेत-तालाब योजना

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रीवन गांव के श्रीकांत का खेत तालाब। संवाद - फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। कृषि विभाग की खेत-तालाब योजना जनपद के किसानों को खूब भा रही है। यही कारण है कि जिले में पांच वर्ष में 1951 किसानों ने अपने खेतों में तालाब खोदने में सफल रहे हैं। इन तालाबों के जरिए 5400 हेक्टेयर जमीन पर अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था हुई है। वहीं जलस्तर ऊपर उठाने में खासे सहायक साबित हो रहे हैं। कुछ तालाबों में किसानों ने मत्स्य पालन शुरू कर आमदनी दोगुनी करने का जरिया बना लिया है। साथ ही तालाब के चारों तरफ पौधरोपण का भी कार्य किया जा रहा है।
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लगातार जनपद में घटते जलस्तर के चलते वर्ष 2016-17 में सपा सरकार ने खेत तालाब योजना संचालित की थी। तब से इस योजना में 1951 खेत तालाब खोदे जा चुके हैं। वर्ष 2016-17 में 250, वर्ष 2017-18 में 495, वर्ष 2018-19 में 351, वर्ष 2019-20 में 550 एवं वर्ष 2020-21 में 305 छोटे व चालू वित्तीय वर्ष में जिले को 1119 खेत तालाब खोदे जाने का लक्ष्य शासन ने दिया है। जिसमें अब तक 1166 किसान आवेदन कर चुके हैं। इनमें 887 किसानों के टोकन जनरेट हो चुके हैं। वहीं 541 ने बैंक में दो हजार रुपये जमाकर रजिस्ट्रेशन कराने के साथ 139 खेत तालाब खोदे जा चुके हैं। तालाब खुदवाने वाले किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान शासन से दिया जा रहा है।
किराए का पंपिंग सेट लेकर की सिंचाई
विकास खंड मौदहा के रीवन निवासी श्रीकांत ने बताया बीते वर्ष खेत में खेत तालाब योजना से बड़ा आकार का तालाब खुदवाया था। पिछले साल बारिश का पानी भरने से तालाब लबालब भरा था। जिस पर किराए का पंपिंग सेट लाकर 15 बीघे में पलेवा कर गेहूं पैदा किया था। बताया वहीं तालाब के चारों ओर अरहर बो दी थी। जिसमें दो क्विंटल अरहर पैदा हुई। कहा ये तालाब किसानों के लिए बहुत ही लाभकारी साबित हो रहे हैं।
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नहीं मिला पंपसेट
पत्योरा निवासी किसान जयवीर सिंह ने बताया वर्ष 2018-19 में खेत तालाब योजना से एक तालाब खुदवाया था। जिसमें पूरे वर्ष पानी भरा रहता है। पंप सेट की व्यवस्था न होने से सिंचाई नहीं हो पाती है। बताया पहले विभाग की ओर से कहा गया कि योजना से लाभान्वित किसानों को सिंचाई के लिए अनुदान पर पंप सेट मुहैया कराए जाएंगे। लेकिन कोरोना काल के चलते यह योजना संचालित नहीं की गई। अगर सरकार किसानों को सिंचाई के लिए पंप सेट मुहैया कराए तो इन तालाब के पानी से तीन हेक्टेयर तक सिंचाई की हो जाएगी।
किसान कर रहे मत्स्य पालन
बैजेमऊ निवासी अवधेश कुमार ने बताया वर्ष 2019-20 में योजना से प्रभावित होकर खेत में तालाब खुदवाया था। बीते साल से मत्स्य पालन शुरू किया है। जिसमें करीब एक लाख की मछलियां बेची थी। मछली पालन से अच्छा लाभ है। इससे पूरे साल भर घर का खर्च चलता है। कहा कि किसानों के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं है। बताया उनके गांव के करीब 10 किसान मत्स्य पालन कर रहे हैं।
खेत तालाब में मिला 50 प्रतिशत अनुदान
जिले में दो प्रकार के तालाब खोदे जाते हैं। बड़े आकार के तालाब की लंबाई 35 व चौड़ाई 30 मीटर व गहराई 3 मीटर है। बड़े आकार के तालाब में सवा दो लाख की लागत आती है। वहीं छोटे आकार के तालाब की लंबाई 25 व चौड़ाई 20 मीटर व गहराई 3 मीटर है। इनमें कुल लागत की पचास फीसदी सब्सिडी के रूप में किसान को मिलती है।
जनपद में 1951 तालाब किसानों ने खेतों में खुदवाए हैं। इनके जरिए 5400 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था हुई है। बड़े तालाब से करीब तीन हेक्टेयर व छोटे तालाब से करीब डेढ़ हेक्टेयर का रकबा सींचा जा सकता है। बुंदेलखंड के किसानों के लिए योजना किसी संजीवनी से कम नहीं है। किसान एक बीघे में साल में लाखों रुपये कमा सकते हैं। जलस्तर बढ़ाने के साथ आमदनी के लिए भी अच्छा स्रोत यह तालाब साबित हो रहे हैं। शासन से 1119 तालाबों का लक्ष्य मिला है। जिसमें 139 तालाब खोदे जा चुके हैं। जिसमें सबसे अधिक सरीला, गोहांड व राठ के किसान शामिल हैं। -भीमसेन, भूमि संरक्षण अधिकारी प्रथम
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