हमीरपुर। जिला अस्पताल में दो वर्षों से रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से अल्ट्रासाउंड मशीन ठप पड़ी है। एक सैकड़ा मरीज प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड की जांच कराने सदर अस्पताल आते हैं, लेकिन मजबूरी में प्राइवेट सेंटरों में जांच के लिए जाना पड़ता है। दूसरी ओर शहर में प्राइवेट तीन अल्ट्रासाउंड सेंटरों में मरीजों की भीड़ जमा रहती है। हालत यह है कि जांच के अभाव में पुलिस विभाग की चार सैकड़ा से अधिक मारपीट की विवेचनाएं लंबित है।
महोबा से बनकर आती है रिपोर्ट
एसपी कमलेश कुमार दीक्षित कहते हैं कि यहां रेडियोलाजिस्ट नहीं होने से विभाग की करीब 400 से ज्यादा मारपीट की विवेचनाएं लंबित हैं। महोबा से मेडिकल रिपोर्ट आने में महीनों लग जाने से पीड़ित को समय से न्याय नहीं मिल पाता है। इसके लिए उन्होंने अपने स्तर से पत्राचार किया है।
दलालों व चिकित्सकों की होती है मोटी कमाई
नाम न छपने की शर्त पर शहर निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि महिला व पुरुष अस्पताल में दलालों का बोलबाला है। जो मरीजों को गुमराह कर अपने पैथोलाजी सेंटरों में ले जाते हैं। जहां से उन्हें प्रति मरीज 50 रुपया बतौर कमीशन मिलता है। जो चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए लिखता है। उसे 200 रुपये प्रति मरीज फीस दी जाती है। कहाकि अल्ट्रासाउंड सेंटरों में 500 से लेकर 700 रुपये तक की जांच की जा रही है।
प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से इस संबंध में चर्चा की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही समस्या का निराकरण कराया जाएगा। शासन स्तर पर भी पत्राचार किया गया है। जल्द ही कुछ समाधान निकलेगा।
डा.एके रावत, सीएमओ