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33 वर्ष बाद दुष्कर्म के आरोपी सिपाही को दस वर्ष की कैद, 50 हजार जुर्माना

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हमीरपुर। किशोरी को ले जाने और बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के दोषी सिपाही को अदालत ने 10 साल कैद की सजा सुनाई है। 50 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम गीतांजलि गर्ग ने जुर्माने की आधी रकम पीड़िता को देने का आदेश दिया है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि शहर कोतवाली निवासी पीड़िता के पिता सरकारी विभाग में लिपिक थे। उन्होंने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री 29 दिसंबर 1988 की रात गुम हो गई है। पुलिस लाइन में तैनात जालौन निवासी सिपाही रामबाबू उसे गुमराह कर गलत इरादे से ले गया। बताया कि आरोपी सिपाही अक्सर उनके घर आता जाता था। मामले में पुलिस ने आठ जनवरी 1989 को अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने अपह्त किशोरी को 12 जनवरी 1989 को सिपाही के पुलिस लाइन स्थित सरकारी आवास से ढूंढ निकाला। पीड़िता के अदालत में कलम बंद बयान कराए। उसने बताया था कि आरोपी सिपाही उससे झूठ बोलकर घर ले गया। पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखा और दुष्कर्म करता रहा।
दो साल बाद होगा सेवानिवृत
पैरोकार बिजमान सिंह ने बताया कि आरोपी सिपाही रामबाबू जनपद जालौन के थाना आटा के भदरेखी गांव निवासी है। सेवानिवृत के अभी दो वर्ष शेष थे। यहां से उसका झांसी स्थनांतरण हुआ। वहां से तबादले पर जनपद ललितपुर चला गया। तबसे ललितपुर में तैनात है। अदालत से सजा होने पर सोमवार को उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में उसने वर्ष 1992 में हाईकोर्ट से स्टे ले लिया और करीब 30 वर्ष तक पुलिस विभाग में कार्यरत रहा।
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