प्रदेश से सपा सरकार की विदाई के साथ ही अब पंचायतोें में भी तख्ता पलट की भूमिका तैयार होने लगी है। जिला पंचायत अध्यक्ष समेत कई ब्लॉक प्रमुख और प्रधानों की कुर्सी हथियाने को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई। तमाम दिग्गज सदस्यों को सहेजने के साथ ही लखनऊ से लेकर जिला प्रशासन और पंचायती राज कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी समेत ब्लॉक प्रमुखों की ज्यादातर कुर्सी सपाइयों के कब्जे में है। ये सपाई कम से कम दो साल तक इन कुर्सियों पर बने रहें इसके लिए सपा सरकार ने एक प्रस्ताव तैयार कराकर कैबिनेट से उसे स्वीकृत भी करा लिया था लेकिन राज्यपाल ने उसपर अपनी स्वीकृति नहीं दी। इससे वह लागू नहीं हो सका। यानी पूर्व की ही तरह अभी भी जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख के शपथ लेने के साल भर बाद कभी भी अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें हटाया जा सकता है। दक्षिणांचल के एक ब्लॉक प्रमुख को कुर्सी से हटाने के सिलसिले में ही विकास भवन पहुंचे एक दिग्गज का कहना था कि उन्हें यह नहीं पता था कि दो साल की शर्त लागू ही नहीं हो पाई। अब जाकर उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तैयारी तेज कर दी है। यही नहीं तख्ता पलट का अवसर खोज रहे ज्यादातर लोगों को अब तक इसकी जानकारी नहीं हो पाई थी। भाजपा की सरकार आने के बाद लखनऊ से ही इसका खुलासा हुआ।
बहुमत को आधे से एक अधिक सदस्य जरूरी
पंचायती राज कार्यालय के मुताबिक जिला पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख को पद से हटाने के लिए आधे से एक सदस्य अधिक होना जरूरी है। ये सभी सदस्य डीएम को शपथ पत्र देंगे। डीएम शपथपत्रों का सत्यापन कराकर या बैठक कर संबंधित जिला पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख को पद से हटा सकते हैं।
आसान नहीं होगा जिला पंचायत की कुर्सी हिलाना
जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हिला पाना आसान नहीं होगा। जिला पंचायत सदन के 73 सदस्यों में से ज्यादातर सपाई है। इनकी संख्या 50 फीसदी से अधिक बताई जाती है। बाकी में भाजपा और बसपा के सदस्य हैं। ऐसे में 37 के आस-पास सदस्यों को तोड़ पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा। जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजलि यादव के पति व पूर्व जिला महासचिव मनुरोजन यादव को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है। ऐसे में सपाइयों की उनके प्रति निष्ठा भी मजबूत है।