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शिक्षक को ऐसे आयोजनों से बचने की जरूरत

Mon, 25 Apr 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ललित कला विभाग में पिछले वर्ष शिक्षक दिवस पर हुए सम्मान समारोह में विभाग के शिक्षक डॉ. भारत भूषण द्वारा शिष्यों से पैर धुलवाने और आरती उतरवाने की खबर रविवार को तेजी से फैली। शिक्षक इसे लेकर संतुलित बयान देते दिखे तो विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया तीखी रही। चाहे शिक्षक हो या फिर विद्यार्थी दोनों की प्रतिक्रियाओं में एक बात साफ तौर पर निकल कर सामने आई कि आज के परिवेश में एक शिक्षक को ऐसे आयोजनों से बचना चाहिए।
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शिक्षकों का बयान
लोकतंत्र में सामंतवादी परंपरा की झलक
डॉ. भारत भूषण शिक्षा की उच्चतम संस्था के सम्मानित शिक्षक हैं। उन्हें पुरानी गलत परंपराओं को ढोने के बजाय नए स्वस्थ परंपरा की नींव रखनी चाहिए। यदि विद्यार्थियों के दबाव में भी यह कार्य हुआ है तो उन्हें अपने शिष्यों को ऐसा न करने के लिए बाध्य करना चाहिए था। इस वीडियो से लोकतांत्रिक देश में सामंतवादिता की झलक दिखाई देती है। कम से कम एक बुद्धिजीवी को तो ऐसा नहीं करना चाहिए। 
- रजनीश कुमार श्रीवास्तव, शिक्षक, जनता इंटर कॉलेज


गुरु-शिष्य परंपरा पर सवाल का भय
हालांकि यह वीडियो गुरु-शिष्य परंपरा की बानगी है। लेकिन आज के परिवेश में किसी भी शिक्षक को ऐसे आयोजन से बचना चाहिए। शिक्षक और शिष्य के संबंध के लिए किसी तरह के आयोजन की जरूरत नहीं होती। मुझे भय इस बात का है कि कहीं इन आयोजनों से उठ रहे सवाल को लेकर गुरु-शिष्य परंपरा पर ही सवाल न उठ जाए। क्योंकि शिक्षक के सम्मान पर उठने वाला सवाल गलत संदेश जाएगा। 
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- डॉ. प्रदीप राव, प्राचार्य, एमपी पीजी कॉलेज, जंगल धूसड़


छात्रों की प्रतिक्रिया
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प्रायोजित लग रहा है यह आयोजन
वीडियो देखकर साफ तौर पर लग रहा है कि कहीं न कहीं यह आयोजन प्रायोजित है। पैर धोकर आशीर्वाद लेने वाले कुछ विद्यार्थियों में तो गुरु के प्रति श्रद्धा दिख रही है लेकिन कुछ बेमन से कोटा पूरा करते नजर आ रहे हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि उन्हें सम्मान के लिए मजबूर किया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन को ऐसे आयोजन को संज्ञान में लेकर गंभीर पड़ताल करनी चाहिए। जिससे सच सामने आए। 
- शिवाली सिंह, छात्रा बेतियाहाता


सामूहिक श्रद्धा कैसे हो सकती है?
कुछ शिष्यों का अपने शिक्षक के प्रति इस तरह का लगाव हो सकता है कि वह उनकी आरती उतारें या पैर धोएं लेकिन पूरी कक्षा के विद्यार्थियों की एक साथ ऐसी श्रद्धा कैसे हो सकती है? निश्चित ही कार्यक्रम योजनाबद्ध था। वीडियो में सभी शिष्यों में एक जैसी श्रद्धा नहीं दिख रही। वैसे भी यह आयोजन व्यक्तिगत हो तो ठीक है, यूनिवर्सिटी जैसी संस्था में नहीं होना चाहिए। इससे गलत परंपरा की नींव पड़ेगी। 
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- अत्रि श्रीवास्तव, छात्र, हुमायूंपुर
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