मेडिकल कॉलेज में लगा ऑक्सीजन कैप्सूल।
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मेडिकल कॉलेज में लिक्विफाइड ऑक्सीजन की सप्लाई बंद करने की जांच पूरी हो गई है। दो सदस्यीय टीम ने जांच रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी के सुपरवाइजर ने ही ऑक्सीजन बंद किया था और ऑक्सीजन खत्म होने की अफवाह फैला दिया था। कॉलेज प्रशासन ने जांच रिपोर्ट डीजी हेल्थ को भेजी है। जिसकी कॉपी प्रमुख सचिव, कमिश्नर और डीएम को भी भेजा गया है। आला अफसरों के निर्देश आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
27 अप्रैल की रात मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी कमलेश त्रिपाठी को सुपरवाइजर ने ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी दी। जिसके बाद आनन फानन उसने सभी आला अफसरों को इसकी जानकारी दे दी। लिक्विफाइड ऑक्सीजन बंद होते ही स्थिति बिगड़े न इसके लिए तत्काल सिलिंडर वाले ऑक्सीजन की व्यवस्था कर ली गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य ने डॉ. सतीश कुमार और डा. शहनवाज को शामिल करते हुए एक कमेटी गठित कर दी। सुपरवाइजर अखिलेश वर्मा से जब पूछताछ की गई तो सामने आया है कि ऑक्सीजन मौजूद था मगर उसने बंद कर दिया। उसने लिखित तौर पर इस बात को स्वीकार कर लिया है कि पुष्पा सेल्स के मालिक के कहने पर उसने ऐसा काम किया था।
हालांकि मालिक का कहना है कि सुपरवाइजर गलत बोल रहे हैं। पूछताछ के बाद से ही सुपरवाइजर फरार चल रहा है। प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा ने बताया कि रिपोर्ट मिल गई है। सुपरवाइजर ने जानबूझ कर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की थी।