जवाहर लाल मौर्या, जगदीश यादव, चंद्रबली यादव, फि रंगी प्रसाद, डॉ मोहसिन खान, राम भुआल निषाद, अवधेश यादव, रजनीश यादव, शारदा देवी, विजय बहादुर यादव, अमरेन्द्र निषाद, यशपाल रावत, साधु यादव, मनुरोजन यादव, कृष्ण कुमार त्रिपाठी, मनोज यादव, मिर्जा कदीर बेग, अशोक यादव, राघवेंद्र तिवारी राजू, रामजतन यादव, दयानंद विद्रोही, रामनाथ यादव, पंकज शाही, सिंहासन यादव, हाजी शकील अंसारी, शहाब अंसारी, इनामुल्ला खान, देवेंद्र भूषण निषाद, मैना भाई, कीर्ति निधि पांडे, गवीश दूबे, प्रमोद यादव समेत सैकड़ों पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
किसी पर कोई सख्ती नहीं की गई। कार्यक्रम की अनुमति नहीं थी। पहले अनुमति दी गई थी मगर शुक्रवार को वृहद पौधरोपण अभियान की वजह से मजिस्ट्रेट या पुलिस अफसर खाली नहीं थे। कानून व्यवस्था न प्रभावित हो इसलिए अनुमति खारिज कर सपा नेताओं को जानकारी दे दी गई थी। जबरन विरोध-प्रदर्शन की कोशिश पर उन्हें हिरासत में लिया गया। थोड़े समय बाद छोड़ दिया गया- राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम सिटी
किसी पर भी बल प्रयोग नहीं किया गया। दो-ढाई सौ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था मगर दोपहर बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। धरना- प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। पहले अनुमति दी गई थी लेकिन कानून व्यवस्था के मद्देनजर उसे निरस्त कर दिया गया। इसकी जानकारी पार्टी के नेताओं को दे दी गई थी- विपिन सिंह, सीओ कोतवाली
'लाठी के दम पर आवाज दबा रही सरकार'
सपा के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव और महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम ने आरोप लगाते हुए कहा कि अनुमति होने के बाद भी जिला प्रशासन और पुलिस ने कार्यकर्ताओं लाठियां बरसाई।
उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने अनुमति निरस्त की तो उसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि लाठियों के दम पर सरकार उनकी आवाज नहीं दबा सकती। वह जनता के हितों के लिए आवाज उठा रहे थे। मगर सरकार, लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन कर रही है।