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धरना देने जा रहे सपाइयों पर भांजी लाठियां, कई हिरासत में लिए गए

Sat, 10 Aug 2019 05:33 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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सपा कार्यकर्ता - फोटो : Amar Ujala
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कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को नगर निगम में धरना देने जा रहे सपा कार्यकर्ताओं को रोकने के  लिए पुलिस ने लाठियां भांजी। इस दौरान 200 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। इन्हें चार बसों से पुलिस लाइंस ले जाया गया जहां दोपहर बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। हालांकि पुलिस किसी भी तरह के बल प्रयोग से इनकार कर रही है। जिला प्रशासन के मुताबिक बिना अनुमति धरने पर सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना पड़ा। जबकि सपा नेताओं का दावा है कि उन्होंने अनुमति ली थी।  

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धरना-प्रदर्शन को लेकर पुलिस और प्रशासन के अफसर पहले से अलर्ट पर थे। शुक्रवार की सुबह ही एडीएम (सिटी) राकेश कुमार श्रीवास्तव और सिटी मजिस्ट्रेट अजीत सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस वालों ने बेतियाहाता स्थित सपा कार्यालय के आस-पास मोर्चा संभाल लिया था। कार्यालय पर एकत्रित होने के बाद जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव और महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम के नेतृत्व में सुबह 11 बजे कार्यकर्ता नगर निगम के लिए निकले। मगर, टीडीएम तिराहे के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

इसपर सपा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर सभी को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस दौरान युवजन सभा का एक कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रही बस के सामने लेट गया। इससे अफरातफरी का माहौल बन गया। उधर, पुलिस ने बेलीपार, सहजनवां से आ रहे कई कार्यकर्ताओं को शहर में प्रवेश नहीं होने  दिया। 
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विरोध-प्रदर्शन की 10 दिन से चल रही थी तैयारी  

अगस्त क्रांति दिवस पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रस्तावित इस धरने को लेकर पार्टी में पिछले 10 दिनों से तैयारियां चल रही थीं। जगह-जगह होर्डिंग और बैनर लगाने के साथ ही पूरे जिले से कार्यकर्ताओं को जुटने के लिए कहा गया था। पहले धरना कमिश्नर कार्यालय परिसर में होना था, मगर अनुमति नहीं मिलने पर इसे नगर निगम परिसर में करने की योजना बनी थी।

धरना प्रदेश में खराब होते कानून व्यवस्था,  बिजली कटौती, बिजली की दरों में वृद्धि, डीजल-पेट्रोल की बढ़ती दरें, गन्ना किसानों का बकाया, गौशालाओं में गायों की अनदेखी,  ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव, नकली शराब का धंधा बंद करने, शराब माफि या पर सख्त कार्रवाई, खनन माफि याराज खत्म करने, सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की योजना में भ्रष्टाचार और हाईस्कूल, इंटर की परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाने की तैयारी थी। 

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विरोध में ये रहे शामिल

जवाहर लाल मौर्या, जगदीश यादव, चंद्रबली यादव,  फि रंगी प्रसाद, डॉ मोहसिन खान, राम भुआल निषाद, अवधेश यादव, रजनीश यादव, शारदा देवी, विजय बहादुर यादव, अमरेन्द्र निषाद, यशपाल रावत, साधु यादव, मनुरोजन यादव, कृष्ण कुमार त्रिपाठी, मनोज यादव, मिर्जा कदीर बेग, अशोक यादव, राघवेंद्र तिवारी राजू, रामजतन यादव, दयानंद विद्रोही, रामनाथ यादव,  पंकज शाही, सिंहासन यादव, हाजी शकील अंसारी, शहाब अंसारी, इनामुल्ला खान,  देवेंद्र भूषण निषाद, मैना भाई, कीर्ति निधि पांडे, गवीश दूबे,  प्रमोद यादव समेत सैकड़ों पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

किसी पर कोई सख्ती नहीं की गई। कार्यक्रम की अनुमति नहीं थी। पहले अनुमति दी गई थी मगर शुक्रवार को वृहद पौधरोपण अभियान की वजह से मजिस्ट्रेट या पुलिस अफसर खाली नहीं थे। कानून व्यवस्था न प्रभावित हो इसलिए अनुमति खारिज कर सपा नेताओं को जानकारी दे दी गई थी। जबरन विरोध-प्रदर्शन की कोशिश पर उन्हें हिरासत में लिया गया। थोड़े समय बाद छोड़ दिया गया- राकेश कुमार श्रीवास्तव, एडीएम सिटी

किसी पर भी बल प्रयोग नहीं किया गया। दो-ढाई सौ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था मगर दोपहर बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। धरना- प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। पहले अनुमति दी गई थी लेकिन कानून व्यवस्था के मद्देनजर उसे निरस्त कर दिया गया। इसकी जानकारी पार्टी के नेताओं को दे दी गई थी- विपिन सिंह, सीओ कोतवाली 

'लाठी के दम पर आवाज दबा रही सरकार'

सपा के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव और महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम ने आरोप लगाते हुए कहा कि अनुमति होने के बाद भी जिला प्रशासन और पुलिस ने कार्यकर्ताओं लाठियां बरसाई।

उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने अनुमति निरस्त की तो उसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि लाठियों के दम पर सरकार उनकी आवाज नहीं दबा सकती। वह जनता के हितों के लिए आवाज उठा रहे थे। मगर सरकार, लोकतांत्रिक अधिकारों का भी हनन कर रही है।
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