रउआ सभी के प्रणाम...। इस उद्बोधन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चिरपरिचित शैली में भारी भीड़ के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किया। मौका था खाद कारखाना और एम्स के शिलान्यास करने के बाद आयोजित रैली में जनसमूह को संबोधन का।
कहा ‘आप एतनी संख्या में अइलीं कि मोदी गदगद हो गइल। लोकसभा चुनाव के समय बगलिये में मानबेला सभा रहे, ओकरो आप रिकार्ड तोड़ दीहलीं। आसमान से ऊहां तक लउकतबा। केंद्र सरकार बनवले दोईए साल में वादा करे वाला काम बतावे आइल बानी’। भोजपुरी में इतना बोलने के बाद वे अपनी शैली में आ गए। कहा कि 26 साल से बंद कारखाना मेरे कारण चालू हो रहा है, यह कहना गलत है। यह क्रेडिट जनता को जाता है। आपने पूरे देश से सांसदों को एकतरफा जिताकर भेजा। यदि ऐसा नहीं होता तो आज खाद कारखाना लटका ही रहता।
कहा, लोग कहते हैं कि मैं सोता नहीं। अरे ये सांसद आपके काम के लिए मुझसे दिन-रात दिल्ली में लड़ते हैं। मेरे से भी लोहा ले लेते हैं। ये हमें सोने देंगे क्या। इसका क्रेडिट महंत सहित सभी सांसदों को है। मोदी ने कहा कि मैं यहां दो पहिये पर रथ चलाने आया हूँ। जब पश्चिम की तरह पूर्वी पहिया भी मजबूत होगा तभी तेज गति से विकास होगा।
रैली में नेपाल और बिहार से भी पहुंचे लोग
एम्स और खाद कारखाने के शिलान्यास से नेपाल और बिहार के लोगों को भी काफी उम्मीदे हैं। उन्हें रोजगार तो मिलेगा ही, इलाज की बेहतर सुविधा भी मिलेगी। यही वजह थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखने और सुनने के लिए यूपी के साथ ही नेपाल और बिहार से भी काफी लोग रैली स्थल पर पहुंचे थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने खाद कारखाने का शिलान्यास कर जहां पिछड़े पूर्वांचल के विकास में एक कड़ी और जोड़ दी वहीं एम्स का शिलान्यास कर पूर्वांचल के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य की परिकल्पना को साकार किया। इन दोनों बड़े प्रोजेक्ट के शिलान्यास से प्रत्यक्ष तौर पर भले ही पूर्वांचल के लोगों को फायदा होता दिख रहा है, मगर अप्रत्यक्ष तौर पर नेपाल और बिहार को भी इसका लाभ मिलेगा। रैली स्थल पर नेपाल के गोरखा जिले से पहुंचे कील बहादुर, नीरगंज जिले के अंगद छेत्री, तन्नू जिले के मनोज थापा और पालपा जिले के रामनाथ क्षेत्री ने बताया कि बड़ा अस्पताल (एम्स) बन जाने से उनका इलाज आसानी से हो जाएगा, क्योंकि नेपाल में इलाज की अच्छी सुविधा नहीं है। खाद कारखाना बनेगा तो उन्हें भी रोजी-रोटी मिलेगी।
रैली में पहुंचे बिहार के छपरा के अजय कुमार, बेतिया के विमलेश शाही, सिवान के अनिल सिंह और बक्सर के विनय पांडेय ने बताया कि रेलवे में जिस तरह से बिहार के काफी लोगों को नौकरी मिली है। ठीक उसी तरह से खाद कारखाना लगने पर बिहार के लोगों को भी रोजगार मिलेगा और एम्स में बढ़िया इलाज तो होगा ही।