फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन करते छात्र छात्राए ।
- फोटो : Mahesh Kumar
इटली और चीन के पहाड़ों की खूबसूरती और इनके बीच ब्राजील में नदी किनारे बसे शहर की तस्वीरें नजदीक आने को मजबूर कर रही हैं तो चिकित्सा व शिक्षा से जुड़ी बुनियादी जरूरतों को समेटने वाली तस्वीरें जीवन की सच्चाई बयां कर रही हैं। यही वजहें है कि विश्व फोटोग्राफी दिवस पर फोटो जर्नलिस्ट और क्रिएटिव फोटोग्राफर्स की संस्था लेंसमेन द्वारा गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ललित कला विभाग के साथ मिलकर लगाई गई प्रदर्शनी की फोटो हर कद्रदान को लुभा रही है।
13 देशों और 13 राज्यों के छायाकारों की 130 तस्वीरों को लेकर ‘बोले दुनिया’ की थीम पर गोरखपुर यूनिवर्सिटी के अमृता कला वीथिका में लगाई गई तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फोटो प्रदर्शनी का कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी किसी विषय की प्रस्तुति का सशक्त जरिया है, जो उस विषय का समूचा इतिहास समेटे होती है। बतौर विशिष्ट अतिथि प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि चूंकि छायाकारों की प्रतिस्पर्धा खुद में होती है, ऐसे में साल-दर-साल तस्वीरों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।
ललित कला और संगीत विभाग की अध्यक्ष डॉ. उषा सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन नए कलाकारों में ऊर्जा भरने का कार्य करते हैं। विशिष्ट अतिथि अजय शाही ने कहा कि कला वीथिका में लगी हर तस्वीर फोटोग्राफरों के संघर्ष की दास्तां है। उद्घाटन आयोजन को डॉ. सत्येंद्र सिंह, डॉ. भारत भूषण और प्रदर्शनी के संयोजक संदीप श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। प्रदर्शनी में 72 लाख के जीफा अवार्ड विजेता अनुराग की ‘मथुरा की होली’ के छायाचित्र के प्रति लोगों का विशेष आकर्षण देखा गया। इस दौरान वेद प्रकाश पाठक, अमित सिंह पटेल, शिवहर्ष द्विवेदी, संजय शर्मा, आनंद चौधरी, रत्नेश श्रीवास्तव, अनुपम, गौरीशंकर चौहान, गौरव, विवेक अस्थाना, उमेश पाठक, योगेश प्रताप सिंह समेत तमाम लोग उपस्थित रहे।
‘शब्दचित्र’ कार्यशाला आज
प्रदर्शनी के आयोजकों ने बताया कि शनिवार को छायाकारों को फोटोग्राफी की नई तकनीक और विजन से रूबरू कराने के लिए ‘शब्दचित्र’ विषय पर कार्यशाला होगी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के कोऑर्डिनेटर डॉ. धनंजय चोपड़ा इसके मुख्य वक्ता होंगे। आयोजकों ने बताया कि प्रदर्शनी शनिवार और रविवार सुबह 11:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक खुली रहेगी।