61वें रेल सप्ताह पुरस्कार वितरण समारोह मे लखनऊ मंल के लोगो के साथ रेलवे जीएम व अन्य।
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रेल सप्ताह पर मंगलवार को रेलवे स्टेशन के फर्स्ट क्लास गेट पर तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी लगाई गई, जिसका उद्घाटन पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव मिश्र ने किया। तीन दिनों तक लगने वाली इस प्रर्दशनी में एनईआर के अतीत को जानने के लिए लखनऊ मंडल ने रेल से जुड़ी पुरानी यादों से संबंधित रोमांचित करने वाली तस्वीरें लगाई हैं।
प्रदर्शनी देखने के बाद महाप्रबंधक ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें सचमुच रोमांचित करने वाली हैं। इससे लोगों को इतिहास की जानकारी भी होगी। स्टेशन पर प्रदर्शनी को देखने के लिए देर शाम तक लोगों के आने का सिलसिला चलता रहा।
कभी खंडहर जैसा दिखता था रेलवे स्टेशन
प्रदर्शनी में गोरखपुर रेलवे स्टेशन की 19वीं शताब्दी की तस्वीरें लगाई गई हैं। स्टेशन पर देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पूर्व रेलमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के आने की तस्वीरें हैं तो कई तस्वीरें उस वक्त की हैं, जब स्टेशन खंडहर जैसा दिखता था। प्रदर्शनी में पुराने स्टीम इंजन, स्टेशन बिल्डिंग, लोको शेड कारखाने की तस्वीरें लोगों को रोमांचित कर रही हैं। वहीं, गीता प्रेस, इमामबाड़ा, रूमी दरवाजा, कुशीनगर, देवीपाटन आदि धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व से जुड़ी तस्वीरें भी हैं।
नुक्कड़ नाटक से जागरूक किया
फोटो प्रदर्शनी के बाद रेलवे के प्रति लोगों को जानकारी देने और जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इसके बाद हुई गोष्ठी में सीपीआरओ संजय यादव ने अतीत का जिक्र करते हुए बताया कि देश में 16 अप्रैल 1853 को बोरीबंदर से ठाणे के बीच 34 किमी की पहली रेलगाड़ी चलाई गई थी। इसके बाद 14 अप्रैल 1952 को एनई रेलवे की स्थापना हुई थी।