फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामगढ़ताल: छह सितंबर को एनजीटी में पहली सुनवाई

विज्ञापन
विज्ञापन
रामगढ़ताल: छह सितंबर को एनजीटी में पहली सुनवाई
विज्ञापन

गोरखपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की हाई पावर कमेटी के सामने बात न बनने पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब सीधे एनजीटी की शरण में चला गया है। प्राधिकरण ने वहां अपील दाखिल कर दी है, जिसपर छह सितंबर को सुनवाई की पहली तारीख तय हुई है।
हाई पावर कमेटी, रामगढ़ताल के पांच सौ मीटर के दायरे में हुए सभी निर्माण ध्वस्त करने की एनजीटी को संस्तुति कर चुका है। इसके बाद जीडीए ने अपनी संस्तुति में बदलाव के लिए कमेटी को प्रत्यावेदन सौंपा था। कई तारीखों के बाद भी किन्हीं न किन्हीं वजहों से कमेटी में सुनवाई नहीं हो सकी। पखवारे भर पहले लखनऊ में हुई बैठक में कमेटी ने यह कहते हुए जीडीए के प्रत्यावेदन को ठुकरा दिया कि उनकी संस्तुति को एनजीटी ने स्वीकार कर लिया है, ऐसे में कमेटी अब उसमें कोई बदलाव कर ही नहीं सकती।
विज्ञापन

इसके बाद से ही जीडीए ने एनजीटी में अपील दाखिल करने की तैयारी शुरू कर दी थी। जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि प्राधिकरण ने अपना पक्ष तैयार कर लिया है। कहीं भी पांच सौ मीटर के दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध नहीं है। वेट लैंड नोटिफिकेशन में सिर्फ 50 मीटर के दायरे में ही प्रतिबंध का जिक्र है। इस दायरे में हुए निर्माण को चिह्नित कर हाई पावर कमेटी को पहले ही रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। इस दायरे में 393 निर्माण चिह्नित किए गए हैं।
छह महीने से विकास पर ब्रेक
हाई पावर कमेटी की तरफ से पांच सौ मीटर के दायरे में निर्माण कार्य पर रोक लगाने के बाद करीब छह महीने से रामगढ़ताल के आस-पास के दायरे में विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गया है। किसी भी निर्माण कार्य के लिए जीडीए मानचित्र नहीं स्वीकृत कर रहा है। यहां तक की लोहिया एन्क्लेव फेज एक का ब्याज का मामला सुलझने के बाद भी आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा है। वहीं जीडीए की महत्वकांक्षी परियोजना लेक व्यू का भी निर्माण कार्य बाधित है।
विज्ञापन

सख्ती के बाद डरे हुए हैं 50 हजार लोग
रामगढ़ताल किनारे पांच सौ मीटर के दायरे में आने वाले सभी निर्माण ध्वस्त करने की हाई पावर कमेटी की संस्तुति के बाद से ही इस दायरे में आने वाले करीब 50 हजार लोगों में भय है। उनका कहना है कि नियम कायदे से जमीन रजिस्ट्री कराने के बाद भी उनकी सांसें अटकी हुई हैं कि उनके आशियाने का भविष्य क्या होगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें