गोरखपुर। साल भर से लापता गोरखपुर यूनिवर्सिटी के सहायक रजिस्ट्रार शिवपूजन को गिरफ्तार करने की तैयारी है। प्रदेश शासन ने विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) को उनकी गिरफ्तारी की अनुमति दे दी है। आगरा यूनिवर्सिटी में फर्जी मार्कशीट और डिग्री जारी करने के आरोपी शिवपूजन पर मुकदमा दर्ज करने के बाद एसआईटी ने उनकी तलाश शुरू कर दी थी लेकिन उनकी गिरफ्तारी में शासन की अनुमति का पेंच फंसा हुआ था। अब यह अड़चन दूर हो गई है।
सहायक रजिस्ट्रार शिवपूजन सितंबर 2014 में आगरा यूनिवर्सिटी से तबादले के बाद गोरखपुर यूनिवर्सिटी आए थे। उन्होंने 20 सितंबर को यूनिवर्सिटी में ज्वाइन तो किया लेकिन महज एक दिन बाद यह कहकर चले गए कि परिवार लेने जा रहे हैं। लेकिन फिर नहीं लौटे। यूनिवर्सिटी के कर्मचारी और अधिकारी यह मान कर चल रहे थे कि सहायक रजिस्ट्रार छुट्टी पर हैं। लेकिन छह महीने पहले आगरा यूनिवर्सिटी के फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कर रहे न्यायिक अधिकारी एलसी हारित का पत्र यूनिवर्सिटी प्रशासन को मिला, जिसमें शिवपूजन के बारे में जानकारी मांगी गई थी तो यह जानकारी हुई वे छुट्टी पर नहीं बल्कि लापता हैं। पत्र मिलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें तलाशने की कोशिश की लेकिन न तो सहायक रजिस्ट्रार मिले और न ही उनका कोई पता।
थक-हारकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शासन को शिवपूजन के गोरखपुर यूनिवर्सिटी से लापता होने की रिपोर्ट दे दी। पिछले दिनों आगरा यूनिवर्सिटी में फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने जब सभी आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराया तो लापता शिवपूजन की गिरफ्तारी का मामला फंसा। चूंकि वे शासन से नियुक्त हुए थे, लिहाजा उनकी गिरफ्तारी के लिए शासन की अनुमति जरूरी थी। लापता शिवपूजन की तलाश कर रही एसआईटी के सामने यह संकट था कि यदि वे मिल जाते हैं तो बिना अनुमति गिरफ्तारी कैसे होगी?
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार संवर्ग का नियोक्ता चूंकि शासन होता है, इसलिए गिरफ्तारी के लिए शासन की अनुमति जरूरी थी। जो अब मिल गई है। जहां तक उनकी तलाश का मामला है, यूनिवर्सिटी प्रशासन भी अपने तरीके से इसे जारी रखे है।
-प्रभाष द्विवेदी, रजिस्ट्रार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी