लेखपालों की हड़ताल पर गोरखपुर में भी सख्ती शुरू हो गई है। शुक्रवार को जिले की विभिन्न तहसीलों के छह लेखपाल नेताओं को निलंबित कर दिया गया। वहीं तीन दिन में अब तक 500 लेखपालों को नो वर्क नो पे का नोटिस जारी किया जा चुका है।
सीआरओ चंद्रशेखर मिश्रा का कहना है कि शासन ने एस्मा लागू कर रखा है, इसके बाद भी लेखपाल हड़ताल पर हैं जिससे यह कार्रवाई की गई। लेखपाल काम पर नहीं लौटे तो बाकी सभी को भी निलंबित करने के साथ ही उन्हें नो वर्क नो पे का नोटिस दिया जाएगा।
उधर लेखपालों की हड़ताल को अन्य कर्मचारी संगठन भी समर्थन दे सकते हैं। जिला लेखपाल संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक प्रदेश नेतृत्व की इस संबंध में दूसरे कर्मचारी संगठनों से वार्ता चल रही है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन ने लेखपालों की आवाज दबाने के लिए दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। ऐसे में सिर्फ लेखपाल ही नहीं दूसरे विभागों के कर्मचारियों का लोकतांत्रिक अधिकार भी खतरे में है। सभी कर्मचारी संगठन इसे महसूस भी कर रहे हैं।
लेखपाल संघ के मंत्री जगदीश प्रसाद का कहना है कि सोमवार से लेखपालों की हड़ताल में और भी कई कर्मचारी संगठन शामिल हो सकते हैं। संघ का कहना है कि शासन-प्रशासन जबरन आवाज दबाना चाहता है। लेखपालों को बर्खास्त व निलंबित कर उनकी समस्याओं को अनसुना किया जा रहा है। उन्हें डराया जा रहा है। लेखपाल बर्खास्त हो जाएंगे लेकिन अब पीछे नहीं हटेंगे।