मेडिकल कॉलेज में एक मरीज की मौत के बाद हुए जमकर हंगामे पर मानवाधिकार ने रिपोर्ट तलब कर ली है। आरोप है कि हंगामा के बाद जूनियर डॉक्टरों ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी जिस वजह से पांच अन्य मरीज की भी मौत हो गई थी। इस मामले में दो नोटिस जारी होने के बाद भी जवाब न देने पर मानवाधिकार ने डीएम और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को छह जून को दिल्ली में तलब किया है।
हालांकि आयोग की ओर से आए पत्र में कई सवाल पूछे गए हैं। कहा गया कि यदि 30 मई तक उसका संतोषजनक जवाब भेजा गया तो आने की जरूरत नहीं होगी। पत्र आने के बाद से ही मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया है और विभागाध्यक्ष अपनी अपनी सफाई दे रहे हैं।
4 दिसंबर 2012 को मेडिकल कॉलेज में सड़क हादसे में घायल दिलीप कसौधन की मौत हो गई थी। तब घर वालों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था।
तीमारदारों के हंगामा से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था। गुलरिहा थाने में इस संबंध में रिपोर्ट भी दर्ज है। मामला मानवाधिकार आयोग में पहुंचा तो 16 नवंबर 2015 को नोटिस जारी कर मेडिकल कॉलेज प्रशासन से जवाब मांगा गया। जवाब न आने पर 15 जनवरी 2016 को फिर रिपोर्ट तलब की गई। रिमाइंडर के बाद भी जवाब न आने पर अब आयोग ने पत्र जारी कर डीएम और डीजी हेल्थ को पूरे प्रकरण में तलब कर लिया है।
मानवाधिकार आयोग का पत्र आने के बाद बाल रोग विभाग के अध्यक्ष ने अपनी ओर से सफाई भी भेज दिया है। उन्होंने कहा है कि मौतों से हमारे विभाग का कोई लेना देना नहीं है।
आयोग ने यह पूछे हैं सवाल
क्या दिलीप कसौधन के इलाज में लापरवाही हुई है?
क्या जूनियर डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सप्लाई बंद की और छह मौतें हुई?
क्या जिन मरीजों की मौत हुई उनका पोस्टमार्टम कराया गया?
यदि पोस्टमार्टम कराया गया तो रिपोर्ट क्या आई?
गुलरिहा थाने में दर्ज रिपोर्ट की अब तक की प्रगति क्या है?