गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की पुस्तकों को अब धरोहर के तौर पर रखा जाएगा। प्रत्येक शिक्षक की लिखित दो-दो पुस्तकें केंद्रीय ग्रंथालय में रखने की तैयारी है। इसके लिए केंद्रीय ग्रंथालय में एक स्पेशल बुक कॉर्नर बनाया जा रहा है। सभी पुस्तकों के विवरण को बाद में ऑनलाइन कर दिया जाएगा ताकि कोई भी आसानी से पुस्तकों के बार में जानकारी हासिल कर सके।
विश्वविद्यालय के बहुत सारे ऐसे आचार्य हैं जिनकी पुस्तकों की मांग देश में ही नहीं विदेशों में भी है। बहुत सारी पुस्तकों का उपयोग शोधार्थी करते हैं। लेकिन विश्वविद्यालय में कुछ पुराने आचार्यों की पुस्तकें विभागों में तो मिल जाएंगी लेकिन एक स्थान पर उनका संग्रह नहीं है। इससे उन पुस्तकों को खोजने में काफी परेशानी होती है। अब स्पेशल कार्नर बनने से पुस्तकों तक पहुंच आसान हो जाएगी। कुलपति की अनुमति के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है।
विश्वविद्यालय के मानद ग्रंथालयी प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि विभागाध्यक्षों से उनके यहां के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों की सूची मांगी गई है। इसके अलावा बहुत सारे ऐसे विद्वान आचार्य थे जिनका निधन हो चुका है और कुछ सेवानिृवत्त शिक्षक हैं, उनकी पुस्तकों को भी एकत्र किया जाएगा।
अब एक क्लिक पर मौजूद हैं ग्रंथालय में पुस्तकें
गोरखपुर विश्वविद्यालय की केंद्रीय ग्रंथालय में अब विद्यार्थियों को पुस्तकें लेने या वापस करने के लिए काउंटर पर देर तक खड़ा नहीं होना पड़ रहा है। विद्यार्थी के डिजिटल लाइब्रेरी कार्ड पर एक क्लिक करते ही उसके अकाउंट की सूचना कंप्यूटर के स्क्रीन पर मिल रही है। किताब पर पड़े बारकोड पर दूसरे क्लिक के बाद उस किताब की सभी सूचनाएं उपलब्ध हो रही हैं।
विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी में ऑटोमेशन का पहला चरण पूरा हो गया है। पहले चरण में 67,000 पुस्तकों का लक्ष्य रखा गया था, जो पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में लगभग दो लाख और पुस्तकों की डिजिटल आइडेंटिटी, चिह्नित करने और वर्गीकरण का काम चल रहा है।