दो सौ से अधिक स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन सख्त हो गया है। अनुमोदित शिक्षकों की जगह मानक से कम मानदेय देकर अयोग्य शिक्षकों से शिक्षण कार्य कराने की मिल रही शिकायत के बाद इस पर लगाम लगाने की रणनीति यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने तैयार की है।
इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शिक्षकों का मानदेय भुगतान खाते के माध्यम से करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसका प्रमाण भी यूनिवर्सिटी के लेखा विभाग में उन्हें प्रस्तुत करना होगा। ऐसा नहीं करने वाले महाविद्यालयों की संबद्धता निलंबित करने की चेतावनी भी यूनिवर्सिटी की ओर से दी गई है।
दरअसल यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस बाबत लगातार शिकायत मिल रही थी कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता का स्तर संतोषजनक नहीं है। जब इसे लेकर यूनिवर्सिटी की ओर से पड़ताल की गई तो पता चला कि ज्यादातर महाविद्यालयों में अनुमोदन किसी योग्य व्यक्ति का है जबकि अध्यापन कार्य कोई ऐसा व्यक्ति कर रहा है, जो शिक्षक होने की योग्यता ही नहीं रखता। इस पर लगाम लगाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यह रास्ता निकाला कि अनुमोदित शिक्षक का मानदेय यदि उसके खाते में भेजने की बाध्यता कर दी जाए तो शायद इस पर लगाम लग सके। इसी क्रम में यूनिवर्सिटी ने महाविद्यालय प्रबंधन के सामने यह बाध्यता रखी है। यूनिवर्सिटी की ओर से इस निर्णय को महाविद्यालयों को अवगत करा दिया गया है। जिसे लेकर महाविद्यालयों में खलबली मची हुई है।
खाते से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए महाविद्यालयों को पत्र भेजे जा रहे हैं। यूनिवर्सिटी हर हाल में इस आदेश का पालन कराएगी। जिन महाविद्यालयों ने खाते से भुगतान का प्रमाणपत्र यूनिवर्सिटी को नहीं दिया, उनके खिलाफ संबद्धता के निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
- प्रभास द्विवेदी, रजिस्ट्रार, गोरखपुर यूनिवर्सिटी