पुलिस ने जब भी की सख्ती, बवाल ही हुआ
गोरखपुर। तीन साल पहले 13 अक्तूबर 2016 गोरखपुर जेल का बवाल हो या फिर 26 अप्रैल 2016 को देवरिया जेल का हंगामा। हर एक बार वजह सख्ती ही सामने आती है। जब भी जेल में बदमाशों की नकेल कसने को पुलिस का दखल बढ़ा, पूरी व्यवस्था बेपटरी हो जाती है। इस बार भी कुछ ऐसे ही आरोप पुलिस पर लग रहे हैं। न्यायालय परिसर में पेशी के दौरान मारपीट हुई तो सख्ती को पुलिस पहुंची। नतीजा हंगामे के तौर पर सामने आया। जेल प्रशासन ने सीओ पर आरोप लगाए और अनुशासनात्मक कार्रवाई को भी लिखा, लेकिन पत्र के नीचे हस्ताक्षर को कोई तैयार नहीं हुआ। वायरल पत्र एडीजी जेल तक भी पहुंचा और उन्होंने सही भी माना, मगर गोरखपुर जेल से जुड़ा कोई अफसर इस पर बोल नहीं रहा।
पुराना घटनाक्रम गवाह है कि गोरखपुर जेल में 2016 में बवाल की वजह एक कैदी की मौत थी, लेकिन यह सिर्फ बहाना था। वजह थी बदमाशों पर लगाम लगाने को सख्ती। गेट पर पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई थी, ताकि अंदर मोबाइल फोन ना जा पाए। क्योंकि, 10 अक्तूबर 2016 को जेल से 129 मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इसी बीच एक सजायाफ्ता कैदी की मौत को मुद्दा बनाकर बवाल कर दिया गया।
कुछ ऐसा ही देवरिया जेल में भी अप्रैल 2016 में हुआ। उस समय एसपी रहे प्रभाकर चौधरी ने सख्ती की तो मादक पदार्थ जेल गेट पर ही पकड़ लिया गया। इसके दूसरे ही दिन जेल में बवाल हो गया। वह भी इस कदर की बंदी समेत 37 लोग जख्मी हो गए। खुद एसपी को भी चोट आई थी।