नियम कानून ताक पर रखकर गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के पूर्व सीईओ ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने जिन्हें प्लाट आवंटित कर दिया, उनमे से ज्यादातर के पास पहले से गीडा में जमीन है। उधर, कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद द्वारा कराई गई जांच के मामले में अभी उन्हें कोर्ट से राहत मिली थी कि अब शासन ने उनपर शिकंजा कस दिया है।
कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के साथ ही लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में भी पूर्व सीईओ दोषी पाए गए हैं। इसपर शासन ने चकबंदी आयुक्त डॉ हरिओम को उनपर लगे आरोपों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। जल्द ही उनके गोरखपुर आने की उम्मीद है।
लगातार मिल रही शिकायतों पर कमिश्नर पी. गुरुप्रसाद ने पूर्व सीडीओ कुमार प्रशांत और पूर्व अपर आयुक्त (प्रशासन) बसंत राम से पूर्व सीईओ की जांच कराई थी। इसमें पाया गया कि गीडा के 26 प्लाट के आवंटन के लिए विज्ञापन निकाला गया था मगर 83 प्लाटों का आवंटन कर दिया गया। इनमें भी ज्यादातर वे आवंटी हैं जिन्हें पहले भी गीडा में जमीन आवंटित हो चुकी है।
यही नहीं, सेक्टर 22 में एलॉट कुछ वाणिज्यिक भूमि का भू-परिवर्तन कर संबंधित आवंटियों को सेक्टर नौ में ग्रीन बेल्ट की जमीन आंवटित कर दी गई। गीडा के औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर 13 में गीडा बोर्ड से अनुमोदित औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण दूर करने के लिए ग्रीनरी के लिए आरक्षित किया गया था, जहां पार्क बनाए गए थे, मगर पेड़-पौधे काटकर पार्क का वजूद खत्म कर दिया गया और उसकी जमीन भी चहेतों को आवंटित कर दी गई।
कमिश्नर की रिपोर्ट पर जब शासन ने चार्जशीट भेजने को कहा तो गर्दन फंसती देख पूर्व सीईओ हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने सीनियर अफसर की जांच जूनियर द्वारा किए जाने को गलत बताते हुए कार्रवाई तो रोक दी मगर शासन को वरिष्ठ अफसर से पूर्व सीईओ की जांच की छूट दे दी। इसी बीच लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में भी पूर्व सीईओ के दोषी मिलने पर शासन ने चकबंदी आयुक्त को उनके खिलाफ जांच का निर्देश दिया। उन्हें एक महीने में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।