एसटीएफ की गोरखपुर इकाई ने फर्जी शैक्षिक दस्तावेज के सहारे नियुक्ति पाने और बर्खास्त शिक्षकों को बचाने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में सिद्धार्थनगर के बीएसए के स्टेनो, शिक्षक और तीन बिचौलियों को सोमवार की देर रात गोरखपुर क्लब के पास से गिरफ्तार कर लिया। इन सबके पास से रिश्वत के 2.50 लाख रुपये के अलावा व्यक्तिगत 16,260 रुपये नकद और एक स्कार्पियो भी बरामद की गई।
एसटीएफ जल्द ही बीएसए से पूछताछ कर सकती है। फिलहाल, मंगलवार को आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। गोरखपुर एसटीएफ ने रिश्वत लेने के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद बीएसए के स्टेनो हरेंद्र कुमार सिंह, फर्जी शैक्षिक दस्तावेज के सहारे नियुक्त शिक्षक सच्चिदानंद पांडेय, एक महिला शिक्षक के पति अवधेश मिश्रा, चंद्रदेव पांडेय और बाबूलाल को गिरफ्तार किया है।
इस मामले की जानकारी प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को दी गई है। एसटीएफ के एसएसपी राजीव नारायण मिश्र को बर्खास्त शिक्षकों को बचाने के एवज में रिश्वत वसूलने की शिकायत मिली थी। एसटीएफ के मुताबिक आरोपियों ने अब तक करीब 40 लाख की वसूली की है जिसे बरामद करने कोशिश की जा रही है।
सांसद, विधायक व सामाजिक संस्थाओं के लेटरपैड भी बरामद
एसटीएफ की चंगुल में फंसे आरोपियों के पास से दो सांसदों का और कई सामाजिक संस्थाओं के लेटर पैड भी बरामद किए गए हैं। पूछताछ में स्टेनो ने बताया है कि समाजसेवी फहीम के नाम से फर्जी लेटरपैड खुद बनवाया था। स्टेनो को पता था कि कौन सा शिक्षक फर्जीवाड़ा करके नियुक्त हुआ है। फहीम के नाम से शिकायत की जाती थी। इसके बाद संबंधित शिक्षक को दफ्तर बुलाकर बर्खास्तगी के साथ जेल भेजने का डर दिखाया जाता और रिश्वत ली जाती थी।