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सिद्धार्थनगर के बीएसए पर 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का सनसनीखेज आरोप

Wed, 25 Sep 2019 03:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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डेमो - फोटो : डेमो
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 एसटीएफ के चंगुल में फंसे स्टेनो हरेंद्र कुमार सिंह ने सिद्धार्थनगर के जिला बेसिक शिक्षाधिकारी राम सिंह पर 10 लाख रुपये रिश्वत लेने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। एसटीएफ ने जो फर्द बनाई है, उसमें इसका जिक्र भी है। एसटीएफ के मुताबिक देवरिया के राकेश कुमार सिंह ने शिक्षकों को बर्खास्तगी से बचाने के एवज में रिश्वत के तौर पर 15 लाख रुपये दिए थे। इस आरोप को स्टेनो ने स्वीकार किया और कहा कि इसका वितरण बीएसए व हमारे बीच हुआ है।
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हालांकि कैंट थाने में दर्ज एफआईआर में एक वरिष्ठ अधिकारी के 10 लाख रुपये रिश्वत लेने का जिक्र है। इस मामले की जानकारी शासन को दी गई है। अनुमति मिली तो बीएसए की गिरफ्तारी भी होगी। इसके उलट, बीएसए राम सिंह ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि अब तक 90 शिक्षकों की बर्खास्तगी की जा चुकी है। जांच और आगे की कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं। 


सिद्धार्थनगर के बीएसए के स्टेनो सहित पांच लोगों की गिरफ्तारी से हड़कंप मचा है। गोरखपुर-बस्ती मंडल के अफसर, शिक्षक व कर्मचारी सहमे हैं। एसटीएफ ने जो फर्द बनाई है, उसमें एक-एक करके गड़बड़ी का जिक्र है। स्टेनो हरेंद्र कुमार सिंह से पूछताछ के आधार पर एसटीएफ ने कहा है कि सिद्धार्थनगर बीएसए दफ्तर में तैनात बाबू सुशील श्रीवास्तव ने फर्जीवाड़े में स्टेनो की मदद की है। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिए बीएसए की गतिविधि पर भी निगाह रखी गई थी। कई मजबूत साक्ष्य भी मिले हैं।
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पूरे मामले की जानकारी प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को दी जा चुकी है। शासन से अनुमति मिलते ही बीएसए को गिरफ्तार किया जा सकता है। इसी सिलसिले में एसटीएफ के बड़े अफसरों की एक टीम सिद्धार्थनगर आ सकती है। एसटीएफ के मुताबिक टीईटी का फर्जीवाड़ा अश्वनी श्रीवास्तव नामक व्यक्ति के जरिए किया गया है। इस गिरोह की ऊंची पकड़ थी। परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज में तैनात कोई बाबू मददगार था। फर्जी टीईटी को भी आसानी से सत्यापित करा लिया जाता था।  
 
सिद्धार्थनगर में अब भी 400 शिक्षक फर्जी

स्टेनो ने एसटीएफ को जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक सिद्धार्थनगर में अब भी 400 शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी कर रहे हैं। अलग-अलग लोगों की सिफारिश व रकम देने के बाद ही हरेंद्र यादव, विजय पाल, संजीव कुमार, धर्मेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, अनीश यादव, अभिषेक द्विवेदी, ज्ञान प्रकाश तिवारी, प्रतिभा मिश्रा, रमेश चन्द शुक्ल, धर्मेंद्र, अजय व प्रतिमा, राकेश सिंह, राजेंद्र सिंह को शिक्षक बनाया गया है। संतकबीरनगर के गिरिजेश तिवारी भी फर्जी तरीके से भर्ती हुए हैं। इन सबने 10-10 लाख रुपये खर्च करने का भरोसा दिलाया था। प्रतापगढ़ के हिमांशु सिंह ने अकेले 18 फर्जी शिक्षक तैनात कराए थे।  
 
बरामद मार्कशीट, प्रमाण पत्रों का होगा सत्यापन

स्टेनो सहित पांच लोगों की गिरफ्तारी के साथ ही एसटीएफ ने बड़ी संख्या में फाइलें, मार्कशीट, टीईटी के प्रमाण पत्र, मुहर बरामद की है। इन शैक्षिक दस्तावेजों व प्रमाण पत्रों की जांच कराई जाएगी। एसटीएफ के मुताबिक सिद्धार्थनगर से बर्खास्त ज्यादातर शिक्षकों की नियुक्ति देवरिया के राकेश कुमार सिंह के जरिए हुई थी, जो बर्खास्त किए जा चुके हैं। राकेश ने बर्खास्त बृजकिशोर, संपत्ति यादव, जीवन सिंह व धर्मेंद्र यादव का टीईटी प्रमाण पत्र दुरुस्त कराने के लिए ही 15 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। 
 
कंपनी का मालिक है स्टेनो हरेंद्र

बीएसए दफ्तर के हरेंद्र कुमार सिंह कंपनी मालिक भी हैं। उनकी कंपनी क्रेडिट फार्मास्युटिकल लिमिटेड गोंडा है। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी गिरफ्तार किए गए चंद्रदेव पांडेय की थी। चंद्रदेव और बाबूलाल चौधरी ही स्टेनो के बताए शिक्षकों के घर जाकर वसूली करते थे। हिमांशु सिंह, सुरभि उपाध्याय व सच्चिदानंद पांडेय की मुलाकात स्टेनो से गोंडा के होटल जेके पैलेस में हुई थी, जहां बर्खास्त शिक्षकों की बहाली व अनुदानित विद्यालयों में नियुक्ति के संबंध में बात हुई थी। सुरभि उपाध्याय की नियुक्ति के लिए भी रकम दी गई थी।

एसटीएफ के मुताबिक बर्खास्त शिक्षक रमेश चंद्र शुक्ला से 3.25 लाख रुपये वसूले गए थे। गिरफ्तार अवधेश मिश्रा ने भी एक लाख रुपये रिश्वत दी थी। अवधेश का इरादा अपनी पत्नी प्रतिभा मिश्रा की नियुक्ति प्रक्रिया का सही ठहराना और रुका वेतन फिर से दिलवाना था। गिरफ्तार सच्चिदानंद पांडेय ने 2.50 लाख रुपये रिश्वत दिए थे, जिसकी बरामदगी एसटीएफ ने की है। इसी में सुरभि उपाध्याय की नियुक्ति अनुदानित विद्यालय में कराने की टोकन मनी भी शामिल थी।

सिद्धार्थनगर के बीएसए राम सिंह ने बताया कि अब तक 90 शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। कार्रवाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। स्टेनो हरेंद्र कुमार सिंह बढ़िया काम कर रहे थे, इस कारण उन्हें रिलीव नहीं कर सका। शिक्षकों की बर्खास्तगी की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इसे बाधित करने की कोशिश लंबे समय से जारी है। पूरे मामले की जानकारी शासन को दी जा चुकी है। रिश्वतखोरी की जानकारी नहीं थी। जो लोग गलत करें, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एसटीएफ को क्या साक्ष्य मिले हैं, इसकी जानकारी नहीं है। रिश्वत में 10 लाख रुपये लेने के आरोप निराधार व तथ्यहीन हैं। 
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