आग लगने से खेत में जलती गेहूं की फसल।
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गोरखपुर-बस्ती मंडल में कई दिनों से जारी आग के तांडव के पीछे ज्योतिषविद् मंगल-शनि की युति को कारण मान रहे हैं। इससे अनिष्ट के योग बन रहे हैं। ज्योतिष के नजरिये से मंगल-शनि की युति से बना अंगारक योग अभी और भी अंगारे धधका कर तबाही मचा सकता है। ग्रहों के प्रभाव की दृष्टि से मई-जून का महीना भयावह हादसे करा सकता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद मिश्र का कहना है कि इस समय काल पुरुष की कुंडली में मंगल और शनि अष्टम स्थान पर हैं। ये दोनों क्रूर ग्रह परस्पर विरोधी हैं। इनका साथ आना अंगारक योग बनाता है। इस योग से आग की घटनाओं से तबाही, बिजली के चलते हादसे, मौसम में उथल-पुथल और जनसामान्य की सेहत में गिरावट सामने आती है। इसका सीधा प्रभाव प्रकृति पर पड़ता है। अंगारक योग पृथ्वी के ऊपर और नीचे उथलपुथल सामने लाता है।
इन दोनों क्रूर ग्रहों की यह युति सितंबर तक रहेगी, लेकिन योग के मध्यकाल यानी मई-जून में बड़े हादसे सामने आ सकते हैं। कालपुरुष की कुंडली में अष्टम स्थान वृश्चिक राशि का है, जिसका सीधा संबंध भूगर्भ-पुरातत्व से भी होता है। इस राशि में अंगारक योग का बनना उत्तर पूर्व दिशाओं में भूकंप एवं प्राकृतिक आपदा के संकेत दे रहा है।
18 सितंबर तक रहेगा अंगारक योग
पंडित शरद चंद मिश्र के अनुसार 20 फरवरी शाम 4:42 बजे मंगल वृश्चिक राशि में प्रवेश कर चुका है। यहां शनि पहले से मौजूद है। शनि अभी काफी समय तक इस राशि में रहेंगे, लेकिन 18 सितंबर सुबह 7:44 बजे मंगल का स्थान परिवर्तित हो जाएगा। इस बीच अंगारक योग आग के चलते हादसे और प्राकृतिक आपदा सामने लाएगा।