गोरखपुर। डिग्री का फर्जीवाड़ा करने वाले अब मनमानी नहीं कर सकेंगे। गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए डिग्रियों पर बार कोड सिस्टम लागू कर दिया है जिससे डिग्रियों में आ रहे फर्जीवाड़े की शिकायत पर लगाम लगाई जा सके।
नौकरी मिलने के बाद अभ्यर्थियों की डिग्री सत्यापन के लिए संबंधित यूनिवर्सिटी में भेजी जाती है। ऐसी सैकड़ों डिग्रियां सत्यापन के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी भी आती रही हैं, लेकिन पिछले दिनों 100 से अधिक डिग्रियां ऐसी आईं, जो जांच के दौरान फर्जी पाई गईं। इसे गंभीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इससे निपटने का रास्ता निकाला और कई बैठकों के बाद यह निर्णय लिया कि डिग्रियों पर अब बार कोड होगा, जिससे उसका विकल्प न तैयार किया जा सके। यूनिवर्सिटी ने नए सिरे से बार कोड वाली डिग्रियां तैयार कराईं और अब उन्हीं डिग्रियों का वितरण शुरू कर दिया गया है।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बार कोड के अलावा डिग्री पर कई और तरह के अदृश्य कोड हैं, जिनसे डिग्री के फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकेगी। ऐसी सभी डिग्रियों का लेखाजोखा ऑनलाइन होगा। इसे बार कोड के माध्यम से आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होेंने बताया कि इसे लेकर कवायद तो काफी दिनों से चल रही थी, लेकिन पिछले दिनों फर्जी डिग्रियां तैयार करने के कई मामले सामने आने के बाद मानक तय कर नई डिग्री व्यवस्था लागू कर दी गई।
मोबाइल फोन से हो सकेगा सत्यापन
गोरखपुर। परीक्षा नियंत्रक के मुताबिक अब डिग्री का सत्यापन कोई भी व्यक्ति मोबाइल फोन से कर सकता है। शर्त सिर्फ इतनी है कि वह मोबाइल फोन एंड्रॉयड होना चाहिए और उसमें बार कोड स्कैनर का एप होना चाहिए। स्कैनर से डिग्री के नीचे मौजूद बार कोड को स्कैन करते ही छात्र का रोल नंबर और नामांकन नंबर दिखने लगेगा। इससे डिग्री की सत्यता प्रमाणित हो सकेगी।