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बंदियों से मिलने भोर में ही पहुंच गए घर वाले

Sat, 15 Oct 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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बंदियों से मिलने पहुंचे उनके परिजनों द्वारा लाए गए सामानों की जांच करती पुलिस। - फोटो : Amar Ujala
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जेल में गुरुवार को हुए बवाल के बाद दूसरे दिन बंदियों से मिलने उनके घर वाले पहुंच गए। लगभग सभी लोग अपने साथ खाने-पीने का सामान लाए थे। मुलाकात के दौरान जेल अफसर सीसीटीवी कैमरे से बंदियों की गतिविधि की निगरानी कर रहे थे। शताब्दी बैरक में बंद पूर्व मंत्री अमरमणि के बेटे और बेटी भी उनसे मिलने दोपहर के समय पहुंचे थे।
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समाचार पत्रों में जेल में बवाल की खबर पढ़ने के बाद शुक्रवार को बंदियों के घर वाले तड़के ही जेल पहुंच गए। नंबर लगाने के बाद वे मिलने की आस में सुबह दस बजे तक बैठे रहे। ज्यादातर घर वाले अपने साथ खाने-पीने का सामान ले आए थे, लेकिन गेट पर तलाशी लेकर आलू, बैगन और तेल को नहीं ले जाने दिया गया। अंदर केवल भूजा, नमकीन, बिस्किट ही जाने दिया गया। इस दिन रोजाना की तुलना में मुलाकातियों की दोगुनी भीड़ उमड़ने से लंबी लाइन लगी रही। दोपहर दो बजे तक 700 लोगों ने बंदियों से मुलाकात की। घर से लाई गई खाद्य सामग्री मिलने के बाद बंदियों ने भी राहत की सांस ली।

परेशानी केवल उन बंदियों को उठानी पड़ी जिनसे मिलने कोई नहीं पहुंचा। उन्हें दोपहर बाद जेल में बना दाल-चावल ही मिला। जेल के प्रशासन महिला बंदियों के साथ ही उनके बच्चों के खाने की व्यवस्था को लेकर परेशान रहा। इन लोगों के लिए बाहर से भोजन का पैकेट मंगाया गया। डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ला ने बताया कि शनिवार तक किचन को ठीक कर लिया जाएगा। इसके बाद मेस की व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी। बिगड़ी व्यवस्था ठीक करने में जुटे जेल अफसर मंडलीय कारागार में गुरुवार को हुए बवाल के दौरान बंदियों ने जेल के अंदर लगे 14 सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। शुक्रवार को व्यवस्था दुरुस्त करने अफसर पहुंचे तो उन्हें मामले की जानकारी हुई। 13 कैमरे गायब थे, जो मिले ही नहीं। एक कैमरा टूटा मिला। एक महीने पहले खुला पीसीओ भी बंदियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। मेस की व्यवस्था दूसरे दिन भी बहाल न हो पाने पर बंदियों को बाहर से पूड़ी-सब्जी मंगाकर खिलाया गया। 36 घंटे बाद भी जेल के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। बैरक अब भी बंदियों के कब्जे में है। रात में डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बैरक बंद कराया। रात में कोई भी बंदीरक्षक ड्यूटी करने नहीं गया। सुबह पांच बजे बैरक खुलवाने जेल अधीक्षक खुद पहुंचे। उन्होंने स्वयं सभी बंदियों में खाना बंटवाया।
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गुरुवार की घटना के बाद से सभी बंदीरक्षक डर की वजह से ड्यूटी पर नहीं आए। इस पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने कहा कि दो साथियों को घायल हाल में देखकर बंदीरक्षकों में गुस्सा और भय है। वह डर की वजह से अंदर नहीं जाना चाहते। बंदी रक्षकों का कहना है कि वह जान नहीं देंगे। डीआईजी जेल ने बताया कि जेल की स्थिति को पूरी तरह से सामान्य करने की कोशिश हो रही है। शनिवार तक भोजन की व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाएगी। इसके अलावा बंदियों द्वारा तोड़ा गया सीसीटीवी कैमरा भी ठीक करा लिए जाएंगे।
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