बीएड की प्रवेश परीक्षा में एक सप्ताह से भी कम समय रहा गया है लेकिन अब तक यह तय नहीं हो सका कि आखिर गोरखपुर यूनिवर्सिटी परिसर और कॉलेजों में कितनी सीटों पर विद्यार्थियों को बीएड में प्रवेश मिलेगा। सीटों के तय न हो पाने की वजह कॉलेजों का इसे लेकर असमंजस है।
इस वजह से यूनिवर्सिटी द्वारा मांगी गई बीएड शिक्षकों की सूची वे उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। सिर्फ 40 फीसदी कॉलेज ही अपने शिक्षकों की स्थिति यूनिवर्सिटी को बता सके हैं। 60 फीसदी कॉलेजों का अब भी यूनिवर्सिटी को इंतजार है।
दरअसल पिछले सत्र में शिक्षकों का मानक पूरा न होने से यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जहां वित्तपोषित कॉलेजों की सीटें ही शून्य कर दी थीं, वहीं ज्यादातर स्व-वित्तपोषित कॉलेजों की सीटों को आधा कर दिया गया था। यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से मानक को लेकर अचानक की गई इस सख्ती से कॉलेज प्रबंधन में उहापोह की स्थिति बन गई थी।
यही वजह है कि इस बार इसे लेकर कॉलेज प्रबंधन फूंक-फूंककर कदम रख रहे हैं। इसी का नतीजा है कि 60 फीसदी कॉलेज अभी तक शिक्षकों को लेकर अपनी स्थिति यूनिवर्सिटी के सामने साफ नहीं कर सके हैं।
सूत्रों के मुताबिक कॉलेज प्रबंधन खुद की पैदा की गई एक अन्य समस्या से भी उलझे हैं। कॉलेजों ने एक तरफ तो एनसीटीई से 100 सीटों का अनुमोदन करा लिया, दूसरी तरफ अब बीएड कोर्स की घटती मांग को देखते हुए सिर्फ 50 सीटों पर ही प्रवेश लेना चाह रहे हैं। उनका यह असमंजस सीटों की स्थिति साफ नहीं होने दे रहा। अब सवाल यह है कि कॉलेजों का यह असमंजस कब तक सीटों केे तय होने में बाधा बना रहेगा। बीएड प्रवेश परीक्षा 22 अप्रैल को होनी है।
सभी बीएड कॉलेजों से शिक्षकों की स्थिति मांगी गई है, जिसके आधार पर सीटें तय की जानी हैं। कॉलेज इससे बच नहीं सकते। उन्हें अपनी स्थिति बतानी ही होगी ताकि सीटों की संख्या लखनऊ यूनिवर्सिटी को भेजी जा सके। बहुत जल्द इसे लेकर सख्त निर्देश जारी किया जाएगा।
- प्रो. अशोक कुमार, कुलपति, गोरखपुर यूनिवर्सिटी