आकाशवाणी के माध्यम से आवाज की संजीदगी के बल पर चार दशक तक श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली मोहसिना खान का शनिवार की अल सुबह निधन हो गया। करीब सत्तर वर्षीय मोहसिना पिछले कुछ समय से ब्लड कैंसर की शिकायत से जूझ रही थीं और इन दिनों अपने भाई के साथ कानपुर में रह रही थीं, जहां उन्होंने अंतिम सांसे लीं।
मोहसिना खान की आकाशवाणी की प्रसारण यात्रा 1975 में शुरू हुई। शेर-ओ-शायरी के साथ अपनी आवाज की अदायगी के विशेष अंदाज के चलते उन्होंने बहुत ही कम समय में श्रोताओं के दिलों में जगह बना ली। पुरानी फिल्मों का कार्यक्रम ‘भूले बिसरे गीत’ और फरमाइशी फिल्मी गीतों का कार्यक्रम ‘इंद्रधनुष’ पत्र मिला, बाल सखा, लतीफों के कार्यक्रम के खास पेशगी का अंदाज श्रोताओं को इस कदर भाया कि उनके आवाज के चहेतों की लंबी फेहरिस्त बन गई। उनकी आवाज का जादू एक दशक पहले रिटायरमेंट तक बदस्तूर बरकरार रहा।
तमाम कार्यक्रम में साझीदार रह चुके मशहूर एनाउंसर सर्वेश दुबे ने मोहसिना के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि उनका जाना आवाज की दुनिया की एक बेहतरीन प्रतिभा का जाना है। मोहसिना खान के निधन पर नवनीत मिश्र, प्रदीप कुमार गुप्त, पूर्णेंदु उपाध्याय, अखिलेश शर्मा, हसन रिज़वी, शैलेश श्रीवास्तव, डॉ. रामजी मिश्र, इकबाल जकारिया आदि ने गहरा दुख व्यक्त किया है।