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मान्यता के दो साल बाद ही विद्यालय बनेंगे सेंटर

Wed, 14 Nov 2012 12:00 PM IST
Gorakhpur
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गोरखपुर। बोर्ड परीक्षा में ऐसे विद्यालयों को सेंटर नहीं बनाया जाएगा जिन्हें तत्काल मान्यता मिली है। सेंटर बनने के लिए दो साल यह जरूरी है कि मान्यता पत्र निर्गमन के बाद विद्यालय के कम से कम दो साल परिषदीय परीक्षा में शामिल हों। वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य या प्रबंधक को स्वप्रमाणित प्रमाण पत्र देना होगा कि उनके प्रबंधन की ओर से कितने और कौन-कौन से विद्यालय संचालित हैं।
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माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित वर्ष 2013 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र निर्धारण नीति में इस बार काफी बदलाव किया गया है। राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में किसी भी श्रेणी के विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाने के पहले संबंधित विद्यालय के प्रबंधतंत्र या प्रधानाचार्य से इस बात का प्रमाण पत्र लिया जाएगा कि उनके विद्यालय में मानक के अनुरूप स्थान और कक्ष हैं। एक परीक्षा केंद्र पर एक से अधिक विद्यालय के परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए आवंटित करना है। साथ ही एक प्रबंधक द्वारा संचालित एक से अधिक विद्यालयों के विद्यार्थियों का परीक्षा केंद्र उसी प्रबंधक के अधीन संचालित अन्य विद्यालयों पर किसी भी दशा में आवंटित नहीं किया जाएगा। निर्धारण नीति में साफ कहा गया है कि बालिकाओं का सेंटर उनके विद्यालय में ही रहेगा। अगर उनका विद्यालय सेंटर नहीं बना है तो सबसे कम दूरी वाले विद्यालय पर सेंटर रखा जाएगा। इसका कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए कि संस्थागत बालक परीक्षार्थियों को केंद्र निकटतम विद्यालय में हो। लेकिन परीक्षार्थियों की संख्या अधिक है और सभी का समायोजन उस विद्यालय पर संभव नहीं है तो ऐसी स्थिति में इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों को दूर तथा हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की परीक्षा कम दूरी वाले परीक्षा केंद्र पर कराई जाएगी।
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