मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के तीन दिवसीय (12 से 14) तकनीकी महोत्सव ‘टेक सृजन 2018’ में शनिवार को आइस्क्रीम स्टिक से पुल बनाया गया। फिर वजन रखकर उसकी मजबूती देखी गई। निर्णायक मंडल ने आईटीएम गीडा के सर्वेश कुमार और विषव सिंह के स्टिक ओवर ब्रिज के मॉडल को सराहा। कहा कि स्टिक ब्रिज 77 किलोग्राम वजन सह सकता है।
प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के तकनीकी महोत्सव में रोबोटिक्स का मुकाबला रोचक रहा। दूसरे राउंड में रोबो वार कराया गया। उसमें 23 टीमों ने हिस्सा लिया। चार पहिया वाले रोबो एक दूसरे को पीछे छोड़ते दिखे। जब रिजल्ट आया तो आठ टीमें अंतिम चरण में पहुंच सकीं। तकनीकी और सामाजिक विषयों पर मंथन के साथ शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए। इसमें आयुष शेखर सिंह, हर्षिता त्रिपाठी और दिव्यांशी श्रीवास्तव को संयुक्त रूप से पहला स्थान मिला।
अंशिका मिश्रा, रुचि सिंह और सार्थक श्रीवास्तव द्वितीय स्थान पर रहे। स्पीड ब्रेकर से बिजली बनाने, ध्वस्त मकान के निर्माण सामग्री की रिसाइकिलिंग का मॉडल सराहा गया। टेक जार की विजेता अनुष्का प्रजापति रहीं। गगनदीप सिंह और विक्रमादित्य सिंह को माडल भी सराहे गए।
व्यावसायिक ज्ञान में ऋषभ ने बाजी मारी
टेक नीति में विद्यार्थियों के व्यावसायिक ज्ञान को परखा गया। बाजार के उतार-चढ़ाव पर जानकारी ली गई। इसमें एमबीए के ऋषभ दुबे और आदित्य सिंह को पहला स्थान, सार्थक और गौरव सिंह को दूसरा स्थान मिला। तकनीकी ज्ञान पर आधारित सवाल-जवाब में प्रियंका राय का प्रदर्शन श्रेष्ठ रहा। आदित्य और श्रेयस को भी पुरस्कृत किया गया।
गेंद फेंकने की प्रतियोगिता आकर्षक
दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं से 150 मीटर दूर गेंद फेंकने की प्रतियोगिता आकर्षक रही। भावी इंजीनियरों ने पहले स्प्रिंग इलास्टिक एनर्जी, केमिकल एनर्जी और एयर प्रेशर की मदद से शूटिंग मेकनिज्म तैयार किया। फिर गेंद फेंकी गई। इस प्रतियोगिता में बीटेक के अलग-अलग ब्रांच के विद्यार्थियों ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया। साथ ही अंतिम चरण में जगह बनाई।
पोर्टबेल एसी का माडल सराहा
विज्ञान प्रदर्शनी में स्कूली बच्चों ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। लिटिल फ्लावर स्कूल में कक्षा छह के विद्यार्थी प्रखर कुमार सिंह ने पोर्टबेल एसी का माडल बनाकर वाहवाही बटोरी।
इटली के डीजे की बेहतरीन प्रस्तुति
टेक फेस्ट में सांस्कृतिक संध्या का रंग भी जमा। इटली के डीजे अली एस्से ने बेहतरीन प्रस्तुत दी। इस पर भावी इंजीनियर और मैनेजर झूम उठे। एक से बढ़कर एक अंग्रेजी गाने बजाए गए। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।