डुमरियागंज(सिद्धार्थनगर)। एक पखवारे से बाढ़ की चपेट में आए पिकौरा गांव में अब बीमारियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। बुधवार की रात गांव एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि कई लोग बिमारियों से पीड़ित हैं। आवागमन की व्यवस्था न होने से परिजन बच्चों को कंधे पर रख पानी में घुसकर इलाज के लिए ले जा रहे हैं। गांव में चिकित्सकीय सुविधा अब तक नहीं पहुंची है।
बाढ़ का पानी घटने के साथ ही बुखार, खांसी जैसी बीमारियां तेजी से दस्तक दे रहीं हैं। तहसील क्षेत्र के पिकौरा गांव में बाढ़ का पानी हटते ही स्थिति भयावह बन गई है। बुधवार की रात गांव के विनोद की 4 साल की बेटी प्रीती की बुखार से मौत हो गई। प्रीती कई दिनों बुखार से पीड़ित थी। गांव के ही 7 वर्षीय शिवानी पुत्री जगदंबा प्रसाद भी कई दिनों से बुखार से पीड़ित है, स्थिति नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल बस्ती रेफर किया गया है। पिकौरा के अलावा क्षेत्र के सरोथर कठौतिया, महनुआ खास, भनवापुर आदि गांव में दर्जन भर बच्चे बुखार, खांसी व खसरा से पीड़ित हैं। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी भनवापुर डॉ.शैलेंद्र ओझा ने बताया कि दो दिन पहले वह स्वास्थ्य टीम के साथ गांव में दवा का वितरण करवाया गया था। उस समय बीमारी जैसी कोई बात नहीं थी। वह तत्काल गांव में स्वास्थ्य टीम भेज रहे हैं।
यह हैं बीमार
पिकौरा गांव निवासी नन्हकू का पुत्र साहिल (8), सुनैना (3), रमेश के पुत्र अक्षय (5), विशाल (6), गोरखनाथ का ढाई वर्षीय पुत्र आकाश, गणेश यादव का पुत्र अखिलेष (7) व कमलेश (4), आशीष (8) पुत्र लवकुश दुबे, रंजीत (12) पुत्र तुलाराम यादव, संस्कार (1) पुत्र दिनेश के साथ ही सरोथर कठौतिया की मीना (2) पुत्री प्रमेष मौर्या, शिंवागी (1) पुत्री नेवास यादव व महनुआ बुजुर्ग की कविता (16 साल), भनवापुर गांव की सुनीता (35 साल) आदि बुखार से पीड़ित हैं। इनका इलाज भनवापुर सीएचसी में चल रहा है।