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धंधेबाज चोरी का पेट्रोल-डीजल सस्ते में बेचकर काट रहे मलाई

Wed, 26 Jun 2019 01:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला/गोरखपुर
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बैतालपुर डिपो जाने वाले टैंकर से बाल्टी में भरते तेल। - फोटो : amar ujala
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समय: दोपहर 1.30 बजे
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स्थान: चौरीचौरा का सतहवां
तेल का एक टैंकर एक गेट के सामने रुका और खुलते ही अंदर चला गया। टैंकर के अंदर पहुंचते ही हाथों में बाल्टी लिए दो लोग आए और टूल बॉक्स खोलने में जुट गए। कुछ सेकेंड में ही बाल्टियां तेल से भरने लगीं। काम पूरा हुआ तो टूल बॉक्स बंद कर टैंकर गेट से बाहर निकला और देवरिया की तरफ चल पड़ा।

समय: दोपहर 2 बजे।
स्थान: चौरीचौरा का सतहवां
भारत पेट्रोलियम का तेल भरा टैंकर एक ट्रक से सटाकर सड़क के किनारे खड़ा किया गया। इसी बीच एक युवक हाथ में बाल्टी लेकर निकला और सीधे टैंकर के टूल बॉक्स के पास पहुंचा। फिर नजारा पहले जैसा रहा। टूल बाक्स खोलकर तेल से बाल्टी भरी गई। काम पूरा होने का इशारा मिलते ही टैंकर देवरिया के लिए चल पड़ा।
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गोरखपुर। ये दो मामले बानगी भर हैं। चौरीचौरा के सतहवां में दो दुकानें ऐसी हैं, जहां गोरखपुर से देवरिया के बैतालपुर जाने वाले पेट्रोलियम कंपनियों के टैंकर हर 30 मिनट में आकर रुकते हैं। हर टैंकर से तेल निकाला जाता है, फिर वे देवरिया की तरफ चल पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस खेल की जानकारी पेट्रोलियम कंपनियों के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी है, लेकिन कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई जा रही है।
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जैसा रिपोर्टर ने सोमवार को अपनी आंखों से देखा और वीडियो बनाया, उसके मुताबिक देवरिया में दाखिल होने से पहले ही टैंकर चौरीचौरा के सतहवां में रुक जाते हैं। हर टैंकर से करीब 10-15 लीटर तेल निकाला जाता है। इस खेल में टैंकर चालक, सतहवां के दो कारोबारी शामिल हैं। रोजाना करीब 50 टैंकर रुकते हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो करीब 500 लीटर डीजल या फिर पेट्रोल रोजाना टैंकर से निकालकर खुले बाजार में बेचा जाता है।

सब खा रहे मलाई

तेल कंपनी के अफसर, आपूर्ति महकमा और धंधेबाजों की तिकड़ी इस खेल को संचालित कर रही है। इस अवैध धंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि पहले से तय ग्राहक ही यहां आते हैं और उन्हें पेट्रोल पंप से कफी कम कीमत तेल बेंच दिया जाता है। इसकी जानकारी हर स्तर पर है, लेकिन कुछ नहीं होता है।

नकद में होता है भुगतान

धंधे से जुड़े एक परिवार के लोग पहले पेट्रोल पंप से डीजल, पेट्रोल खरीदकर बेचने का काम किया करता थे। बाद में ऐसी सेटिंग हुई कि टैंकर ही आकर खड़े होने लगे। अब तेल चोरी और उसे बेचने का धंधा चमक गया है। इसमें सारा लेनदेन नकद होता है। भारी मुनाफा हुआ तो एक और धंधेबाज बढ़ गया। इससे तमाम टैंकर चालकों का फायदा भी हो रहा है। ज्यादा तेल निकल रहा और नकद भुगतान मिल रहा है। नए धंधेबाज ने एक प्लाट खरीदकर उसकी बाउंड्री कराई है। टैंकरों के आने पर ही इसका गेट खोला जाता है।

होता है दोगुना मुनाफा

धंधेबाज इस खेल से दोगुना मुनाफा कमा रहे हैं। टैंकर वाले प्रति लीटर पेट्रोल का 35 रुपये और डीजल का 30 रुपये लेते हैं। धंधेबाज इसे पेट्रोल पंप से पांच रुपये कम कीमत पर बेचते हैं।

सावधान! सस्ता तेल खरीदने में जा सकते हैं, जेल

आप यदि सस्ते के चक्कर में चोरी के इस तेल को खरीदते है तो आप जेल भी जा सकते है। धारा 411 आईपीसी के तहत पुलिस कार्रवाई कर सकती है। जानकारी के बाद भी चोरी का सामान खरीदने वालों पर इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती है।
 
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