गोंडा। शनिवार को निर्वाचन आयोग ने यूपी विधानसभा सामान्य निर्वाचन की तारीखों की घोषणा कर दी है। सात चरणों में होने वाले निर्वाचन में गोंडा की सातों विधानसभा सीटों के लिए पांचवें चरण में चुनाव होगा।
2017 में भी 27 फरवरी को चुनाव हुआ था और इस बार भी पांचवें चरण में 27 फरवरी को ही चुनाव होगा। अधिसूचना जारी होने व नामांकन करने की तारीखों में केवल एक दिन का अंतर है बाकी पिछले चुनाव की तरह इस बार भी निर्वाचन की तारीखों का एलान किया गया है।
पांचवें चरण के चुनाव के लिए एक फरवरी को अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की आखिरी तारीख आठ फरवरी तय की गई है। नामांकन पत्रों की जांच नौ फरवरी तथा नाम वापसी11 फरवरी को होगा। 27 फरवरी को मतदान होगा। इस बार चुनाव में 24 लाख से अधिक मतदाता सातों सीटों के लिए मतदान करेंगे। इसमें 18 साल से 39 साल तक के 12 लाख युवा मतदाता उत्साह दिखाएंगे।
जिले में सात विधानसभा सीटें हैं। इसमें मेहनौन, गोंडा, कटरा बाजार, करनैलगंज, तरबगंज, मनकापुर (सुरक्षित) व गौरा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। पांचवें चरण के मतदान में कुल 24 लाख 45 हजार मतदाता मतदान करेंगे।
2017 में 2295096 मतदाता थे। इस बार एक लाख 50 हजार अधिक मतदाता मतदान करेंगे। मतदान में इस बार युवाओं की भूमिका बहुत ही अहम होगी। इसमें 18 से 19 वर्ष के 36 हजार, 20 से 29 साल के चार लाख 85 हजार तथा 30 से 39 साल के छह लाख 85 हजार मतदाता पूरे उत्साह में दिखेंगे।
जिले की सात विधानसभा सीटों पर राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व अन्य दलों सहित निर्दल के रूप में 90 प्रत्याशियों ने ताल ठोकी थी। मेहनौन में 15, गोंडा में 15, कटरा बाजार में 10, करनैलगंज में 14, तरबगंज में 10, मनकापुर में 11 तथा गौरा में 15 दावेदार चुनाव मैदान में थे।
बढ़े वोटर के साथ इस बार कोरोना के भी मामले बढ़ रहे हैं। इसलिए इस बार 800 से 1200 वोटर एक बूथ पर मतदान कर सकेंगे। 2017 के निर्वाचन में 2687 बूथ बनाए गए थे। प्रत्येक बूथ पर 1500 मतदाताओं के वोट डालने की व्यवस्था थी। इस बार 228 बूथों की संख्या अधिक है और मतदाताओं को कोविड नियमों का पालन कराते हुए मतदान कराया जाएगा।
चुनावों की घोषणा के साथ ही सामान्य आचार संहिता लागू हो गई है। प्रशासन की टीम घोषणा होते ही सक्रिय हो गई और शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में लगी होर्डिंग्स उतारने का काम शुरू कर दिया है।
शहर के चौक चौराहों पर लगी बड़ी-बड़ी होर्डिंग्स को देर शाम तक हटाया जाता रहा। अब कोई भी राजनीतिक बिना प्रशासन की अनुमति के कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर सकेगा। प्रत्येक आयोजनों की अनुमति लेनी होगी और प्रतिभाग करने पर भी उनके प्रचार के खर्च में जोड़ा जाएगा।