करनैलगंज/गोंडा। सरयू नदी का जलस्तर भले ही खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन कटान तेज हो गई है। नदी अब तटवर्ती गांवों में जमीनों की कटान कर रही है। बृहस्पतिवार सुबह से शुक्रवार शाम तक 36 घंटे में दो हजार बीघे से अधिक जमीन काट चुकी है। तेजी से हो रही कटान से किसानों में बेचैनी है।
बृहस्पतिवार सुबह सरयू खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर चल रही थी, वहीं शुक्रवार शाम तक जलस्तर खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। लगातार घट रहे जलस्तर से सरयू अपने स्वभाव के मुताबिक तेजी से कटान करती हुई लगातार बांध की तरफ रुख कर रही है। ग्राम माझा रायपुर, चंदापुर किटौली बहुवन मदार माझा, पारा, बेहटा, कमियार गांव पूरी तरह पानी से घिरे हैं। मांझा रायपुर अभी भी जलमग्न है। बहुवन मदार माझा, कमियार, पारा और बेहटा के पास कटान चल रही है। दो दिन में दो हजार बीघा से अधिक भूमि कटकर नदी में समा गई। इस भूमि पर गन्ना, मक्का, धान की फसल लगी थी।
सर्वाधिक नुकसान गोंडा के ग्राम बहुवन मदार माझा के ग्रामीणों का हुआ है। जिनकी जमीन बांध के उस पार है और नदी और बांध के बीच में उनकी जमीन कट गई है। गंगाराम यादव, प्यारेलाल, शिवलाल, राम बचन, राहुल यादव, बच्चा लाल, श्रीराम, रामलाल और शिवगोपाल यादव का कहना है कि उनकी अधिकांश जमीन बांध बनने के दौरान बांध के अंदर चली गई थी। एक माह पहले सरयू नदी बांध से करीब एक किलोमीटर दूर थी, अब कटान की जद में है। बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह और अवर अभियंता रवि वर्मा ने बताया कि बांध को कोई खतरा नहीं है।