तुलसीपुर तहसील की करीब आठ लाख आबादी का मुख्यालय से सड़क संपर्क बाढ़ के चलते पिछले पांच दिनों से कटा हुआ है। सभी प्रमुख मार्गों पर आवागमन ठप है। केवल रेल मार्ग से ही तहसील के लोग मुख्यालय पहुंच सकते हैं। ट्रेनें कम होने के कारण इससे भी लोगों को परेशानी हो रही है। उतरौला तहसील के सैकड़ों गांवों में पानी घटने के बाद भी बाढ़ की स्थिति भयावह बनी हुई है। संसाधनों की कमी के चलते बाढ़ पीड़ितों तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पा रही है।
राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार को काफी घट गया है। नदी खतरे के निशान 104.620 मीटर से मात्र 104.740 मीटर पर बह रही है। पानी घटने के बाद भी बाढ़ के हालात बने हुए हैं। तुलसीपुर तहसील को मुख्यालय से सड़क से जोड़ने वाले मार्ग बौद्घ परिपथ, हरिहरगंज-ललिया मार्ग तथा गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग पर आवागमन सोमवार को भी ठप रहा।
इन मार्गों पर अभी भी बाढ़ का पानी भरा है। तहसील के लोगों को मुख्यालय पहुंचने का एक मात्र विकल्प पैसेंजर ट्रेन है। गोंडा-बढ़नी-गोरखपुर रूट पर ट्रेनों की संख्या भी बहुत कम है। सुबह मुख्यालय आने वाला व्यक्ति अर्द्घरात्रि के बाद ही लौट सकता है। दोपहर बाद वापस जाने के लिए ट्रेन ही नहीं है।
उतरौला तहसील में बाढ़ की स्थिति अभी भी भयावह बनी हुई है। तहसील क्षेत्र के करीब 140 गांव अभी भी टापू बने हुए हैं। मनियरिया, खम्हरिया, लखमा, मझारी, टेढ़वा, चुचुहिया, चंदापुर, पचौथा, अल्लीपुर बुजुर्ग, परसौना तथा पाला-पाली आदि गांव में अभी भी पानी भरा हुआ है।
बाढ़ पीड़ितों को कोई सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है। तीन बजे लंच पैकेट लेकर जाने वाली टीमें नाव आदि की कमी के चलते प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच पा रही है। एनडीआरएफ तथा जल पीएसी के पास भी कुल सात नावें हैं इससे हर प्रभावित गांव तक समय से पहुंच पाना संभव नहीं हो पा रहा है। तमाम गांव के लोग प्राइवेट नाव का सहारा ले रहे हैं।
उतरौला एसडीएम रामविलास ने बताया कि सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 26 नावों के माध्यम से 20 हजार पांच सौ लंच पैकेट भेजे गए। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीम भेजकर इलाज कराया जा रहा है। एडीएम/आपदा अधिकारी शिवपूजन ने बताया कि राप्ती नदी का जलस्तर घटने से स्थिति सामान्य होने लगी है। पानी कम होते ही प्रमुख मार्गों पर आवागमन बहाल हो जाएगा।