विश्नोहरपुर (गोंडा)। इंदरपुर गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क दो साल पहले बाढ़ के तेज बहाव में कट गई थी। ग्रामीणों ने मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता तो बना लिया, लेकिन हर साल आने वाली बाढ़ उसे बहा ले जाती है। इससे इंदरपुर, नखरा और सेमरा शेखपुर गांवों की करीब 12 हजार आबादी का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है।
बाढ़ के समय हालात इतने खराब हो जाते हैं कि चौखड़िया पुल से सम्मय माता मंदिर तक नाव चलती है। उसके आगे लोग कीचड़ और पानी के बीच से होकर अपने घर पहुंचते हैं। खेतों की फसलें नष्ट हो जाती हैं और अंबरपुर मजरे के एक दर्जन से अधिक कच्चे घर जलमग्न हो जाते हैं। चौखड़िया पुल से इंदरपुर की ओर जाने वाली पक्की सड़क दो साल पहले बाढ़ में कट गई थी। पिछले साल फिर वही हाल हुआ। विधायक प्रेम नारायण पांडेय ने मिट्टी डालवाकर अस्थायी मार्ग तो बनवाया, लेकिन अब तक पक्के निर्माण की दिशा में कोई काम नहीं हुआ। ग्राम प्रधान विष्णु सिंह का कहना है कि अधिकारियों ने निरीक्षण तो किया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंबरपुर जाने वाली सड़क भी टूट चुकी है और पुलिया जर्जर हालत में है।
लोक निर्माण विभाग, खंड-1 के अवर अभियंता अमरनाथ ने बताया कि इंदरपुर की सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
गांववालों की पीड़ा
अंबरपुर निवासी संजय कुमार का कहना है कि करीब आठ साल से सड़क टूटी पड़ी है, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। इंदरपुर के रहने वाले राजेश साहू बाढ़ आने पर दो महीने तक गांव में पानी भर जाता है। स्कूल बंद हो जाता है, बच्चों की पढ़ाई ठप हो जाती है। वहीं तिलकराम गुप्ता का कहना है कि मुख्य सड़क का निर्माण बहुत जरूरी है, लेकिन हमारी सुनवाई कहीं नहीं हो रही।