गोंडा। कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार से एक बार फिर लॉकडाउन अवधि बढ़ा दी गई है। मंगलवार सुबह खुलने वाला लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिया गया है। आपदा में अवसर तलाशते हुए कारोबारियों ने खाद्य सामग्रियों की कालाबाजारी भी शुरू कर दी है। थोक विक्रेताओं ने स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इससे दुकानों पर राशन का सामान भी महंगा हो गया है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
रोजमर्रा के जरूरी सामानों के दाम अभी से बढ़ा दिए हैं। रिफाइंड पर बीस रुपये, सरसों के तेल पर 25, बेसन पर दस, चना और अरहर की दाल पर दस-दस रुपये, सोयाबीन के दाम में बीस रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके अलावा थोक विक्रेताओं ने खाद्य सामग्रियों का स्टाक शुरू कर दिया है।
जो फुटकर दुकानदारों को दे रहे हैं, वह भी महंगा। एक थोक विक्रेता ने बताया कि राशन सामग्री की डिमांड बढ़ने से महंगाई बढ़ी है, जबकि एक फुटकर दुकानदार ने बताया कि थोक विक्रेताओं ने लॉकडाउन में स्टाक करना शुरू कर दिया है। जो सामान दे रहे हैं।
वह भी महंगा मिल रहा है। थोक विक्रेता स्टाक ऊपर से नहीं आने की बात कह रहे है, जबकि ट्रांसपोर्टर्स की माने तो सामान अन्य दिनों की तरह की आ रहा है। अभी तक न ही स्टाक कम हुआ है और न डिमांड बढ़ी है। खास बात तो यह है कि थोक विक्रेताओं ने लॉकडाउन के नाम पर कालाबाजारी शुरू कर दी है। ग्राहक भी लॉकडाउन के भय से बिना कुछ बोले महंगा सामान खरीद रहे है।
कालाबाजारी से खाद्य सामग्रियों के साथ ही अन्य जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। जिससे आपदा की मार झेल रहे उपभोक्ताओं में रोष है। अधिवक्ता विवेकमणि श्रीवास्तव कहते हैं कि इस महामारी में भी लोग अवसर तलाश रहे हैं। पिछले साल कालाबाजारी करने वालों पर नगर मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी ने कार्यवाई की थी। इस बार भी कालाबाजारी करने वालों पर कार्यवाई होनी चाहिए।
समाजसेवी अंकित शुक्ल कहते हैं कि खाद्य पदार्थों के साथ ही पान मसाला के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। जो दुकानदार जिस रेट मे चाहता है उस रेट में बेंच रहा है। इस पर कार्यवाई होनी चाहिए।
सौरभ तिवारी व विवेक मिश्र कहते हैं कि कुछ व्यापारी इस आपदा की घड़ी में में अवसर खोजने में लगे हैं। थोक विक्रेता माल अपने गोदामों में डंप कर लिए हैं। जिससे छोटेे दुकानदारों को मंहगे में मिल रहा है। जिससे वह और भी मंहगे भाव में बेंच रहें हैं। कालाबाजारी करने वालों पर कार्यवाई होनी चाहिए।
पिछले साल लॉकडाउन का लाभ उठाने वाले दुकानों पर नगर मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी ने को छापेमारी की थी। मुनाफाखोरों को मौके पर पकड़ने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट वंदना त्रिपाठी ने भेष बदलकर स्टिंग ऑपरेशन चलाया
था।
जिसमें तीन दुकानदार ओवर रेटिंग करते पाए गए थे। उनके व्यपारिक प्रतिष्ठानों को सील करा दिया गया था। इसी मामले में आधा दर्जन लोगों के खिलाफ कालाबाजारी की धारा के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस साल नगर मजिस्ट्रेट वंदना त्रिवेदी बीमार चल रही हैं। लेकिन इस बार किसी जिम्मदार अधिकारी का ध्यान कालाबाजारी की ओर नही जा रहा है।