रूपईडीह (गोंडा)। पंचायतों में शहर की तर्ज पर सामुदायिक शौचालय की सुविधा का सपना अधूरा ही है। ब्लाक स्तरीय अधिकारियों, कर्मचारियों की लापरवाही से सामुदायिक शौचालयों का संचालन तय समय पर पूरा नहीं हो सका है। ऐसा तब है, जब इस योजना पर 86 करोड़ 87 लाख 20 हजार रुपये का बजट खर्च हो चुका है। सौ से अधिक शौचालय बाहर से तो चमका दिए और फोटो भी पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं, लेकिन संचालित नहीं है। यहां तक कई शौचालय ऐसे हैं, जिनका कार्य ही अधूरा पड़ा है। अब 31 मार्च तक पूरी तरह योजना को पूरा करना है। फिर अधूरे ही शौचालयों को पूरा दिखाने का खेल शुरू हो गया है।
स्वच्छ भारत मिशन से गांव-गांव सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य हो रहा है। दो वर्ष से अधिक समय बीतने को है, लेकिन अभी तक 80 प्रतिशत शौचालय आज भी अधूरे पड़े हैं। जिले के 16 विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में विगत दो वर्ष से सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराना शुरू हुआ था, लेकिन नौ दिन चलै अढ़ाई कोस की तर्ज पर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य हो रहा है। जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक जनपद के 1214 ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय पर लगभग 86 करोड़ 87 लाख 20 हजार रुपये की लागत से निर्माण कार्य कराना शुरू तो हुआ, लेकिन अभी तक 80 प्रतिशत सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया।
अधिकारी नाराज न हों, इसके लिए सचिवों ने बाहर से रंगाई पुताई कर दरवाजा और कहीं-कहीं पानी की टंकी भी रखा दिया, लेकिन कहीं गड्ढा नहीं है, कहीं सीट नहीं बैठी है, कहीं दरवाजा नहीं लगा है। तो कहीं प्लम्बरिंग का कार्य अधूरा पड़ा है। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि निर्माण कार्य के नाम पर अधिकतर ग्राम पंचायतों के सचिवों व ग्राम प्रधान ने धनराशि निकाल ली और निर्माण अधर में लटक गया। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने बताया कि सामुदायिक शौचालयों के निर्माण की समीक्षा की जा रही है। जहां भी कमी मिलेगी, कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। (संवाद)
भुगतान पूरा निकाला, निर्माण कार्य आज भी अधूरा
रूपईडीह ब्लाक की ग्राम पंचायत बलहीजोत में सामुदायिक शौचालय का पांच लाख 90 हजार की धनराशि का भुगतान ले लिया गया, लेकिन सिर्फ दीवार बनाकर छत डालकर अधूरा छोड़ दिया गया, दीवार चटकी हुई है। इसकी शिकायत ग्राम प्रधान अवंतिका ने गांव के लोगों के साथ शपथ पत्र देकर सीडीओ से की है। आरोप है कि ग्राम पंचायत में पिछले सत्र में ग्राम प्रधान तथा सचिव ने पांच लाख 90 हजार की धनराशि को निकाल लिया है। इसी तरह से गांव में बने पूर्व माध्यमिक विद्यालय के मरम्मत के नाम पर 62 हजार की धनराशि निकाल ली गई है, लेकिन कार्य नहीं कराया गया है। बरसात होने पर छत टपकती है। बच्चों को दो किलोमीटर दूर प्राथमिक विद्यालय में बैठाना पड़ता है। इसकी शिकायत स्कूल के प्रधानाध्यापक राजेश कुमार तिवारी ने विगत आठ जनवरी को पत्र के माध्यम से विभाग में किया था। अभी इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सैकड़ों पंचायतों को कार्य पूरे होने का है अभी इंतजार
जिले की कई ग्राम पंचायतों को अभी कार्य पूरा होने का इंतजार है। माना जा रहा है कि कार्य अधूरा है और बजट में गोलमाल हुआ है। रूपईडीह की पंचायतें बराहेमा, बनगाई, गौंसिहा, वीरपुरभोज, गोपालपुर, लोनावादरगाह, खरगूपुर इमलिया, तेलियानी पाठक, पकड़ी मारूडीह, वीरपुर झलहिया, रज्जनपुर, भवानीपुर खुर्द, कोचवा के सामुदायिक शौचालयों का अधूरा निर्माण तो बानगी भर है। सैकड़ों सामुदायिक शौचालय आज भी अस्तित्व में आने का इंतजार कर रहे हैं।