गोंडा। जिले में परिषदीय विद्यालयोंं में जर्जर भवन ध्वस्तीकरण प्रक्रिया पिछले दो साल से चल रही है। एक बार फिर जिम्मेदारों ने सात दिनों की और मोहलत मांगी है। आलम यह है कि पिछली बैठक में भी डीएम को 15 दिन में ध्वस्तीकरण के लिए चेतावनी देनी पड़ी थी। बुधवार को फिर जिला अनुश्रवण बैठक में जिम्मेदारी तय की गई है।
पिछले दो वर्षों में 406 परिषदीय विद्यालय के भवन जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। तय मियाद से पहले जर्जर होने के चलते 50 से अधिक विद्यालयों को निष्प्रोज्य घोषित करना पड़ा है। हादसे की आशंकाओं के चलते शासन स्तर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के आदेश हो चुके हैं। बावजूद जिले में कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। बुधवार को बैठक में एक बार फिर डीएम नेहा शर्मा से जिम्मेदारों ने सात दिन का समय मांगा है।
इससे पहले हुई बैठक में डीएम ने 15 दिन में कार्रवाई के लिए चेतावनी दी थी। हालांकि, 15 साल से कम समय में जर्जर भवनों का मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। निर्माण प्रभारियों से रिकवरी को लेकर कोई कवायद शुरू नहीं हो सकी। बीएसए प्रेमचंद यादव ने दावा किया था कि जल्द ही गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले निर्माण प्रभारियों से रिकवरी की जाएगी। बावजूद इसके कार्रवाई ठंडे बस्ते में है। इस दौरान बैठक में सीडीओ एम. अरुन्मोली, डीडीओ सुशील कुमार श्रीवास्तव और बीएसए प्रेमचंद यादव समेत अन्य मौजूद रहे।
रैंकिंग सुधारने के लिए दिए दिशा-निर्देश
डीएम ने रैंकिंग सुधारने के लिए बीएसए को निपुण, यू-डायस, बच्चों का रजिस्ट्रेशन, आधार सिडिंग, आपरेशन कायाकल्प, जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण के साथ ही शौचालय, पेयजल, विद्युत कनेक्शन, एमडीएम में भोजन की गुणवत्ता, अध्यापकों की उपस्थिति, स्कूलों की साफ सफाई समेत बिंदुओं पर विशेष सुधार के निर्देश दिए।
घर-घर हो आउट ऑफ स्कूल बच्चों का चिह्नांकन
बैठक के दौरान डीएम ने कहा कि आउट ऑफ स्कूल बच्चों के घर चिह्नित किए जाएं। हाउस होल्ड सर्वे के तहत बच्चों को नवीन कक्षाओं में नामांकन कराना सुनिश्चित किया जाए। ऑपरेशन कायाकल्प से रह गए विद्यालयों का सर्वे कराया जाए। इसमें पेयजल, शौचालय और विद्युत कनेक्शन का समुचित प्रबंध किया जाए।