सरकारी माल से घरों को सजाने वाले लोगों की इस करामात का पता जब सिटी मजिस्ट्रेट को लगा तो सब भाग निकले और माल भी छिपा दिया, लेकिन अधिकारी के पहले ही अमर उजाला के कैमरे ने इस कारनामे को कैद कर लिया। मजे की बात यह रही कि न तो अधिकारियों ने इस मामले में पुलिस को बुलाकर छानबीन कराई और न ही कोई कार्रवाई की।
ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए सरकार इंडिया मार्का नल लगवाने का प्रयास कर रही है। बताया जाता है कि इंडिया मार्का हैंडपंप लगाने के लिए विभाग की ओर से 80 से लेकर 100 फिट तक पाइप थिन राड, हैंडपंप व उसके अन्य पार्ट दिये जाते हैं।
लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से इसे लगाने वाले ठेकेदार पाइप व थिन राड का प्रयोग कम कर बाकी सामग्री बचा ले रहे हैं। जितना बचता है, उसे विभागीय अधिकारी व ठेकेदार बेच लेते हैं या फिर अपने घरों की खिड़कियों व दरवाजे में थिन राड का उपयोग करते हैं।
शुक्रवार को ऐसा ही नजारा शहर के राधाकुंड मोहल्ले में दिखाई पड़ा। यहां जल निगम का एक ठेकेदार जल निगम के थिन राड से अपने मकान की खिड़कियां व दरवाजे बनवा रहा था। लाखों रुपये के थिन राड के कई बंडल बंधे मौके पर पड़े थे।
मौके पर काम कर रहे कारीगर इन थिन राडों के कनेक्टिंग प्वाइंट को कटवाकर अलग कर उसे खिड़की में लगा रहे थे। पूछने पर मौके पर मिले लोगों ने बताया कि यह राड बाजार से खरीद कर लाया गया है।
अब सवाल ये उठता है कि जल निगम के नलों के लिए आपूर्ति होने वाली थिन राड कहां से आ से आ रहा है और उसकी सप्लाई कौन सी दुकान से की जा रही है। बताया जाता है कि सरकारी हैंडपंप में लगने वाले पार्ट की केवल विभाग ही आपूर्ति करता है।
इस बात की जानकारी पाकर मौके पर जब सिटी मजिस्ट्रेट अरुण शुक्ल पहुंचे, तब तक थिन राड के बंडल व इससे बनीं खिड़कियां व दरवाजों को लोगों ने छिपा दिया और मौके से भाग निकले। सिटी मजिस्ट्रेट ने वहां के मजदूूूरों से बात की तो उन्होंने बताया कि बड़े नल के राड से खिड़कियां बनायी गईं।
यह है थिन राड
इंडिया मार्का हैंडपंप में पानी निकालने के लिए थिन राड लगाया जाता है। यह मंहगा पुर्जा है जो अच्छे लोहे से निर्मित होता है। इसके बावजूद लोहे की राड पर थिन रसायन का लेप लगा होता है। इसकी वजह से इस राड में कभी जंग नही लगती। इसकी आपूर्ति सिर्फ जल निगम को होती है।
ठेकेदार लगा रहा तो वह क्या करें
कोई ठेकेदार थिन राड को अपने घर की खिड़कियों में लगवा रहा है तो वह क्या कर सकते हैं। जल निगम के राड को वह अपने पास कहां तक रखते हैं।
-राजेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम
सूचना मिली थी। मौके पर गए थे, लेकिन सामान सहित ठेकेदार भाग गया था। मौके पर मिले मजदूरों से पूछताछ की गई है। इसके लिए जल निगम अभियंता से जवाब तलब किया जाएगा।
-एके शुक्ल, सिटी मजिस्ट्रेट
यह बहुत ही गंभीर प्रकरण है। जल निगम उसका कस्टोडियन है। किसी ठेकेदार को सामान देने के बाद जल निगम की जिम्मेदारी है कि वह देखे कि कहां प्रयोग हुआ है और कहां नहीं। इस बाबत अधिशासी अभियंता से पूछताछ की जाएगी। इसकी जांच भी कराई जाएगी।
-जयंत कुमार दीक्षित, सीडीओ गोंडा