नवाबगंज के साकीपुर चहलावा में सरयू की धारा से कट रहे खेत। - संवाद
करनैलगंज। सरयू नदी के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर से ग्रामीणों की धड़कन तेज हो गई है। बीते 24 घंटे में नदी का जलस्तर 44 सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ का पानी प्रभावित होने वाले माझा के गांवों की तरफ बढ़ने लगा है।
शनिवार सुबह सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर नीचे था। उस समय पानी का डिस्चार्ज 3.39 लाख क्यूसेक था। शाम चार बजे तक जलस्तर पांच सेंटीमीटर बढ़ गया। इससे जलस्तर खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर नीचे रह गया था। रात आठ बजे पानी बढ़कर खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। रविवार सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर बढ़ते हुए खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। शाम तक 24 सेंटीमीटर ऊपर तक पहुंच गया। जबकि डिस्चार्ज मामूली घटकर 3.35 लाख क्यूसेक रहा। शाम तक लगातार जलस्तर बढ़ता रहा। सरयू का पानी अब माझा के गांवों की तरफ बढ़ रहा है।
चंदापुर किटौली के प्रधान प्रतिनिधि ओमप्रकाश द्विवेदी ने बताया कि जो गांव बाढ़ से प्रभावित रहे हैं, उनमें पानी निकल चुका है। एक बार फिर जलस्तर बढ़ रहा है। अभी गांवों में पानी नहीं पहुंचा है। ग्राम नकहरा के मनोज कुमार गुप्ता का कहना है कि गांव से पानी काफी दूर निकल गया था। अब फिर पानी गांव की तरफ बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से कटान से तो राहत है, लेकिन बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है।
बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि जलस्तर में मामूली बढ़ोत्तरी हुई है। जल्द ही डिस्चार्ज भी घट जाएगा। कटान नहीं हो रही है।
कटान के डर से काट रहे फसल, बन रहा पशुओं का चारा
विश्नोहरपुर। माझा क्षेत्र में सरयू का जलस्तर बढ़ने से एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों को पशुओं के चारे का चिंता भी सता रही है।घर लौट चुके लोगों को फिर सुरक्षित ठिकाने की तरफ जाना पड़ सकता है। वहीं, साकीपुर के चहलावा में रविवार को कटान से राममिलन का गन्ना व धान का खेत नदी में समाने लगा। ऐसे में वह पशुओं के चारे के लिए गन्ने की खड़ी फसल काट रहे हैं। गांव के कप्तान यादव पत्नी संग गन्ना काटकर ले जाते दिखे। राजपालक सिंह व शिवप्रसाद शुक्ल का भी गन्ना लगा खेत नदी में समा रहा है। साकीपुर के मजरे बाड़ी में गम्मा यादव, अंबर व शत्रोहन का छप्पर कट गया। शुक्रवार रात रामजनक के दो छप्पर कटकर नदी में समा गए थे, लेकिन, अब तक कोई राजस्व कर्मी नहीं पहुंचा। शुक्लापुरवा माझा की पूरी भूमि कटने से छह परिवार पहले ही सड़क व अन्य जगहों पर गुजर-बसर कर रहे हैं।