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तिर्रेमनोरमा के सुंदरीकरण से संवरेगी गरीबों की जिदंगी

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गोंडा में तिर्रेमनोरमा की फोटो। - फोटो : GONDA
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1गोंडा। जिले के तीर्थराज माने जाने वाले मनवर नदी के उद्गम स्थल तिर्रेमनोरमा के विकास से ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों की भी जिदंगी संवरेगी। उद्यालक ऋषि के इस स्थल का विकास किए जाने की तैयारी विकास महकमे ने शुरू की है। नदी को निर्मल बनाने के साथ ही विकास के लिए तो छह करोड़ की योजना बनी ही है। अब उद्गम स्थल का विकास भी होगा। वहां के सरोवर को निर्मल बनाने के साथ ही पटरियों के निर्माण और स्थल के समतलीकरण समेत कई कार्य होंगे। इस पर एक करोड़ से अधिक का बजट खर्च होगा। स्थल का पर्यटन स्थल की तर्ज पर विकास होगा तो लोगों की आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
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मुख्य विकास अधिकारी आशीष कुमार ने पर्यावरण व जल संरक्षण के साथ ही लाखों लोगों की आस्था से जुड़े इस स्थल के विकास का खाका खींचा है। जिले में मनवर नदी के उद्गम स्थल का अपना अलग ही महत्व है और कार्तिक पूर्णिमा पर मेले का आयोजन होता है। तिर्रेमनोरमा को अब पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा और वहां आवश्यक सुविधाएं भी तैयार की जाएंगी। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग को इस स्थल के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ने जिम्मेदारी दी है। उन्होंने बताया कि तिर्रेमनोरमा से मनवर नदी को उद्गम हुआ है जो जिले में 80 किमी लंबी नदी है और करीब 66 ग्राम पंचायतें नदी के किनारों पर बसे हैं। इन गांवों से होकर नदी गुजरती है, उन गांवों में नदी के किनारे पौधे लगाने के साथ ही पटरियों और सिल्ट सफाई का कार्य हो रहा है।
इसके अलावा गांवों के तालाबों को संवारने का कार्य हो रहा है। अब उद्गम स्थल का सौंदर्यीरण किया जाएगा। इसे पर्यटन के हिसाब से तैयार किया जाएगा। जिससे लोग आम दिनों में भी यहां आएं और तिर्रेमनोरमा का विकास हो। इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। माना जा रहा है कि इंटियाथोक क्षेत्र के तिर्रेमनोरमा का अपना अलग ही महत्व है, यहां पर एक सरोवर भी है और पटरियां बनी हुई हैं। मंदिर भी है, लेकिन यहां उस तरह विकास नही हुआ जैसा लोगों को उम्मीद थी। जिले के पर्यटन स्थलों में तिर्रेमनोरमा शामिल भी है, फिर भी विकास की पहल अब जाकर हुई है। स्थानीय लोगों को प्रशासन के साथ ही जनप्रतिनिधियों से भी काफी उम्मीदें थीं। विकास विभाग की पहल से अब उम्मीदें पूरी होते दिख रहे हैं।
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एतिहासिक धरोहरों में शामिल है प्राचीन तिर्रेमनोरमा
तिर्रेमनोरमा में प्राचीन काल में महर्षि उद्दालक ऋषि मुनि का आश्रम था। यहां स्थित सरोवर से ही मनवर नदी निकलती है। इसके उत्पत्ति महाभारत काल के शल्य पर्व में वर्णित है। महाराजा दशरथ के लिए अयोध्या व बस्ती के सीमा पर स्थित मखौड़ा में यज्ञ के दौरान श्रृंगि ऋषि के अह्वान पर मनोरमा नदी के रुप में सरस्वती देवी प्रकट हुई थीं। जो यहीं से निकल कर मखौड़ा तक पहुंची थीं। उद्दालक ऋषि के पुत्र नचिकेता ने मनवर नदी से थोड़ी दूर स्थित तारी परसोइया नाम स्थान पर ऋषियों और मुनियों को नासिकेत पुराण सुनाया। नासिकेत पुराण में मनोरमा के माहात्म्य का वर्णन है। मनोरमा नदी ही अब मनवर नाम से जानी जाती है और लाखों लोगों के लिए तीर्थ से कम नही है।
स्थानीय रोजगरियों की तरक्की के लिए हैं असीम संभावनाएं
तिर्रमनोरमा के आसपास गावों के स्थानीय लोगों के परम्परागत रोजगार को तरक्की देने की असीम संभावनाएं यहां पर है। उद्गम स्थल के विकास होने से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो स्थानीय रोजगारियों की तरक्की तय मानी जा रही है। स्थानीय लोग मिठाई गट्टा, बरसोला, चूरा, चना समेत कई सामग्री की बिक्री करते हैं। वैसे यह बिक्री मेले के दौरान ही होती है। अब पर्यटन विकास से यहां के गट्टे की खशबू भी लोगों को खींच लाएगी।
तिर्रेमनोरमा से ही मनवर नदी का उद्गम हुआ है, यह जिले की अहम नदी है। नदी के जीर्णोद्वार की परियोजना चल रही है अब उद्गम स्थल का विकास भी कराया जाएगा। तकनीकी अधिकारियों से स्टीमेट मांगा गया है। जल्द ही स्थल के विकास की परियोजना शुरु होगी। -आशीष कुमार, सीडीओ
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