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शुक्रिया सिस्टर ! आप लोगों के जज्बे से जान भी है और जहान भी

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गोंडा। कोरोना महामारी के दौर में मेडिकल स्टाफ से जुड़े कर्मियों ने
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मरीजों की सेवा करने को अपना जीवन भी दांव पर लगा रखा है। इसमें नर्सिंग स्टाफ सबसे अहम व अग्रणी भूूूूमिका निभा रहा है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस पर लोगों ने नर्सिंग स्टाफ के इस सेवा भाव से जुड़े जज्बे को सलाम किया।
इसमें कई ऐसी नर्स भी हैं, जो अपना घर-परिवार छोड़कर कोरोना संक्रमितों के इलाज में जुटी हुई हैं। डाक्टरों के साथ मिलकर फ्रंटलाइन मोर्चा संभालने वाली नर्सों का जोश से भरा सेवा भाव ही मरीजों के जल्दी स्वस्थ होने में मददगार बन रहा है। कोविड अस्पताल में तैनात नर्स प्रियंका पांडेय की सुझ-बूझ से कोरोना पीडिंत महिला का सुरक्षित प्रसव कराया।
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स्टाफ नर्स ने बेहतर देखरेख से बच्चे को संक्रमण का खतरा नहीं हुआ। प्रियंका के इस जज्बे और सेवा की सभी ने खुले दिल से सराहा है। प्रियंका कहती हैं कि मरीजों की खुशी व दुआ के आगे कोरोना का डर खत्म हो जाता है। मरीजों का आशीर्वाद मिलने से कोरोना से जंग का हौसला दो गुना बढ़ जाता है।
नर्सों का कहना है कि कोरोना से कैसा डरना। हर हाल में सेवा करना ही हमारा एकमात्र ध्येय है। यही जज्बा हमें विकट परिस्थिति में भी लड़ने की ताकत देता है। मौजूदा दौर में नर्सों की सामान्य सी लगने वाली ड्यूटी बहुत खास हो गई है।
अस्पताल में पूरी सावधानी बरतने के बाद भी संक्रमण का खतरा तो उनपर हमेशा बना ही रहता है। तभी तो कोरोना वॉरियर्स की लिस्ट में इनका (नर्सो) का नाम बड़े की सम्मान के साथ लिया जाता है। पूरे कॅरियर में नर्सो के लिए यह दौर सबसे कठिन है, लेकिन इस कठिन दौर को भी यह वॉरियर मुस्कुरा कर निभा रही हैं।
मनकापुुर के धुसवा खास की रहने वाली नेहा सिंह एक साल से एससीपीएम हास्पिटल में कार्यरत हैं। वह कहतीं है कि कोरोना काल में ़्ूड्यूटी के दौरान माता-पिता को हमारी चिंता बनी रहती है। पिछले दिनों पिता सुरेश सिंह के कोरोना संक्रमित हो जाने के बाद सभी ने कहा नौकरी छोड़ दो। लेकिन मैने नौकरी नहीं छोड़ी। हमें तो सबकी चिंता करनी है। घर की याद तो आती है लेकिन हमें अपना फर्ज भी निभाना है।
जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स संगीता यादव कहती है कि मुझे नर्स होने पर गर्व है। कोरोना जैसे महामारी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हूं। जब मरीज हॉस्पिटल से स्वस्थ होकर अपने घर जाते हैैं तो वो अपने दिल और दिमाग में हॉस्पिटल के नर्सिंग केयर को याद करके जाते हैैं।
जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स मनीषा यादव कहती है कि सेवा के लिए ही मैैं नर्सिंग क्षेत्र को चुना हूं। कोरोना का डर तो है लेकिन यह भी सच्च है कि डर के आगे ही जीत है। इसलिए मैदान छोड़कर भागने के बजाए लडने की जरूरत है। मानकों का पूरी तरह पालन करते हुए ही मरीजों की सेवा करती हूं।
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कोविड अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स राजकुमारी कहती है कि इस वक्त हमारे संक्रमित होने का खतरा काफी ज्यादा है। इसलिए हम अपना पूरा ख्याल हुए मरीजों की देखभाल कर रहें है। घर से कई बार फोन आता लेकिन ज्यादातर समय उनसे बात नहीं हो पाती।
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