बेटी कविता और पत्नी गुड्डी के साथ बृहस्पतिवार को मजार पर आए। तीन दिन तक बाबा झाड़फूंक करते रहे। इस दौरान हालत बिगड़ती गई। शनिवार दोपहर में मजार पर ही कविता की मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद कार्रवाई शुरू हुई।
मजार पर रहती है भीड़
नवाबगंज कस्बा के समीप ही गुप्ती शहीद शाह की मजार है। वहां लोगों का अक्सर जमावड़ा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के इलाकों से यहां पर झाड़फूंक के लिए लोग आते हैं। मजार के संचालन के लिए समिति भी बनी है। बाहर से आने वाले लोग मजार में ही बने आवास में रहते भी हैं।
झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें, बुखार का कराएं इलाज
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि टायफाइड, मलेरिया या डेंगू बुखार का समय से इलाज न होने पर शरीर व मस्तिष्क में संक्रमण फैल जाता है। ऐसी स्थित में झाड़फूंक के चक्कर में न पड़ें। अपने करीबी स्वास्थ्य केंद्र पर या मेडिकल कॉलेज जाकर उपचार कराएं। बुखार या किसी भी प्रकार की समस्या होने पर गांव की आशा बहू, एएनएम व सीएचओ को जानकारी दें।
परिजनों ने नहीं की शिकायत
थानाध्यक्ष अभय सिंह ने बताया कि किशोरी की मौत की सूचना पर वह खुद मौके पर गए थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने शिकायत नहीं की है।
मुफलिसी में गुजर-बसर कर रहा है परिवार
पीड़ित बाबा की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। वह ऑटो चलाते हैं। उनका बेटा गांव में ट्रैक्टर चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा है।
मौत के बाद भागे मुजाबिर
किशोरी की मौत के बाद मजार के मुजाबिर (कर्ता-धर्ता) भाग निकले। झांड़-फूंक के नाम पर मजार से जुड़े लोग कमाई कर रहे हैं। हालांकि मौत के बाद आरोपी भाग निकले।